नई दिल्ली: मीडिया जगत में नैतिकता और न्याय की बात करने वाले संस्थानों के भीतर का सच कभी-कभी काफी कड़वा होता है। ताजा मामला APN न्यूज़ चैनल का है, जहाँ चैनल के तीन प्रमुख एंकरों नेहा दुबे शर्मा,नलिनी सिंह पालीवाल व वक्ता दुबे के वेतन (Salary) और बकाये को लेकर विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है।
आरोप है कि चैनल मैनेजमेंट न केवल एंकरों का वेतन दबाए बैठा है, बल्कि न्याय की गुहार लगाने पर उन्हें हर तरफ से ब्लॉक कर दिया गया है
मामले के मुख्य बिंदु:
- सैलरी पर रोक: पिछले कई महीनों से तीन एंकरों का वेतन और अन्य भत्ते मैनेजमेंट द्वारा बिना किसी ठोस कारण के रोक लिए गए हैं।
- कम्युनिकेशन ब्लॉक: एंकरों का दावा है कि जब उन्होंने अपने हक के पैसे मांगे, तो मैनेजमेंट ने उनसे बात करने के बजाय उनके नंबर ब्लॉक कर दिए और संस्थान में उनके प्रवेश पर भी पाबंदी लगा दी।
- लेबर कोर्ट की अवमानना: मामला अब लेबर कोर्ट में है। लेकिन यहाँ भी मैनेजमेंट का ढुलमुल रवैया जारी है। मिली जानकारी के अनुसार, मैनेजमेंट की ओर से कोई भी जिम्मेदार प्रतिनिधि कोर्ट की तारीखों पर पेश नहीं हो रहा है, जिससे न्याय मिलने में देरी हो रही है।
क्या यह मीडिया एथिक्स का उल्लंघन है?
एक तरफ मीडिया संस्थान जनता की समस्याओं को उठाते हैं, वहीं दूसरी तरफ अपने ही ‘फ्रंटलाइन वर्कर्स’ (एंकरों) के आर्थिक शोषण और मानसिक उत्पीड़न के आरोपों के घेरे में हैं। लेबर कोर्ट में पेश न होना कानून की प्रक्रिया को जानबूझकर लंबा खींचने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
”जब संस्थान संवाद के सारे रास्ते बंद कर दे और कानूनी प्रक्रिया से भी भागे, तो यह स्पष्ट है कि इरादे नेक नहीं हैं। हम सिर्फ अपना पसीना और मेहनत की कमाई मांग रहे हैं।” — पीड़ित एंकर (नाम गोपनीय)




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