नई दिल्ली। हिंदी पत्रकारिता के एक बेहद प्रतिष्ठित नाम, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक और संपादक प्रियदर्शन मंगलवार (23 जून) को ‘एनडीटीवी इंडिया’ (NDTV India) से सेवानिवृत्त (रिटायर) हो गए हैं। दिसंबर 2003 में चैनल की शुरुआत के समय से ही इसका हिस्सा रहे प्रियदर्शन ने यहां लगभग 23 वर्षों तक अपनी अमूल्य सेवाएं दीं। वे चैनल की संपादकीय टीम के सबसे मजबूत और अहम स्तंभों में से एक माने जाते थे। उनके रिटायरमेंट पर चैनल के सहयोगियों ने भावुक होकर उन्हें एक शानदार विदाई दी और पत्रकारिता में उनके बेजोड़ योगदान को याद किया।
सिर्फ टीवी पत्रकार नहीं, गंभीर लेखक और सांस्कृतिक विश्लेषक
प्रियदर्शन की पहचान केवल टीवी स्क्रीन या न्यूजरूम तक सीमित नहीं रही है। वे एक गंभीर लेखक, स्तंभकार और सांस्कृतिक विश्लेषक के रूप में भी जाने जाते हैं। साहित्य, सिनेमा, राजनीति, समाज और मीडिया जैसे विविध विषयों पर उनकी गहरी पकड़ और समझ है। उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी खासियत तथ्यों की प्रामाणिकता, भाषा की सादगी और विषय की गहराई का एक संतुलित मेल है, जो पाठकों और दर्शकों को सीधे जोड़ता है।

रांची से शुरू हुआ सफर, दिल्ली में बनाई खास पहचान
- शुरुआती जीवन और शिक्षा: मूल रूप से झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले प्रियदर्शन ने रांची विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में एमए (MA) किया।
- शुरुआती जुड़ाव: छात्र जीवन के दौरान ही उनके भीतर का पत्रकार और लेखक जाग चुका था। उन्होंने पढ़ाई के दिनों में ही अखबारों के लिए लिखना शुरू कर दिया था और कुछ समय तक आकाशवाणी (All India Radio), रांची से कैजुअल आधार पर भी जुड़े रहे।
फ्रीलांसिंग से लेकर जनसत्ता और NDTV तक का पेशेवर सफर
प्रियदर्शन का मुख्य पत्रकारिता सफर फ्रीलांस लेखन से शुरू हुआ था।
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- 1993 से 1996: उन्होंने देश की राजधानी दिल्ली में एक स्वतंत्र (फ्रीलांस) पत्रकार के रूप में संघर्ष किया और अपनी कलम की ताकत दिखाई।
- 1996 से 2003: इसके बाद वे हिंदी के बेहद प्रतिष्ठित और वैचारिक समाचारपत्र ‘जनसत्ता’ से जुड़े। यहाँ उन्होंने करीब सात वर्षों तक काम किया और गंभीर पत्रकारिता के गुर सीखे।
- 2003 से 2026: वर्ष 2003 में उन्होंने ‘एनडीटीवी इंडिया’ का रुख किया। इसके बाद से लगातार वे चैनल के साथ जुड़े रहे और एक लंबी व उल्लेखनीय पारी खेली।
”एनडीटीवी से प्रियदर्शन जी के रिटायरमेंट पर उनके सहयोगी और जाने-माने पत्रकार रवीश रंजन शुक्ला भी बेहद भावुक नजर आए। उन्होंने सोशल मीडिया पर पुरानी यादें साझा करते हुए प्रियदर्शन जी के मार्गदर्शन और उनके साथ बिताए पलों को याद किया।”
न्यूजरूम के ‘भाषा और तथ्यों के संरक्षक’
एनडीटीवी इंडिया में अपने लंबे कार्यकाल के दौरान प्रियदर्शन ने संपादकीय संचालन, कंटेंट निर्माण और विशेषकर हिंदी भाषा की शुद्धता को लेकर बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। न्यूजरूम में उन्हें एक ऐसे शांत और गंभीर संपादक के रूप में जाना जाता था, जो तथ्यों से कभी समझौता नहीं करते थे। वे हमेशा स्वस्थ संवाद, रचनात्मक बहस और नए विचारों को प्रोत्साहित करते थे। पत्रकारिता की कई पीढ़ियों ने उनके साथ काम करते हुए भाषा की मर्यादा, सटीक संपादन और पत्रकारिता के नैतिक मूल्यों की बारीकियां सीखी हैं।
साहित्य की दुनिया में भी अमिट छाप: लिखीं 20 पुस्तकें
पत्रकारिता के साथ-साथ साहित्य के मैदान में भी प्रियदर्शन का योगदान बेहद समृद्ध रहा है। वे एक सक्रिय और सम्मानित लेखक हैं।
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- अब तक उनकी 20 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।
- इसके अलावा, उन्होंने वैश्विक और क्षेत्रीय साहित्य की 7 प्रसिद्ध पुस्तकों का हिंदी में अनुवाद भी किया है।
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हिंदी पत्रकारिता के एक युग का पड़ाव
NDTV इंडिया से उनके रिटायरमेंट को हिंदी टीवी पत्रकारिता के एक बेहद गरिमापूर्ण और महत्वपूर्ण अध्याय के समापन के रूप में देखा जा रहा है। उनके विदाई समारोह के बाद मीडिया जगत के तमाम वरिष्ठ पत्रकारों, सहयोगियों, युवा पत्रकारों और शुभचिंतकों ने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से उनके योगदान की सराहना की है और उन्हें जीवन की इस नई पारी और भविष्य के लेखन के लिए ढेरों शुभकामनाएं दी हैं।



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