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रेडियो मिर्ची ग्रुप अब रियल एस्टेट & बिल्डर मालिक को सौंपेगी कानपुर,लखनऊ और नागपुर के FM स्टेशनों का संचालन

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देश के सबसे बड़े निजी एफएम रेडियो नेटवर्क ‘रेडियो मिर्ची’ ने अपने कारोबारी ढांचे में एक बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। बदलती बाजार परिस्थितियों और आर्थिक दबाव के बीच कंपनी कानपुर, लखनऊ और नागपुर में स्थित अपने तीन प्रमुख एफएम स्टेशनों का संचालन एक दूसरी कंपनी को सौंपने जा रही है।

​रेडियो मिर्ची का संचालन करने वाली पैरेंट कंपनी एंटरटेनमेंट नेटवर्क (इंडिया) लिमिटेड (ENIL) के निदेशक मंडल (Board of Directors) ने इन स्टेशनों की परिसंपत्तियों (Assets) को अभिजीत रियल्टर्स एंड इंफ्रावेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड को हस्तांतरित (Transfer) करने के प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी दे दी है।

​क्या है पूरा सौदा? (आसान शब्दों में)

​इस रणनीतिक सौदे के तहत कानपुर, लखनऊ और नागपुर के एफएम स्टेशनों से जुड़े सभी भौतिक उपकरण (Broadcasting Equipment), सरकारी लाइसेंस से संबंधित अधिकार और अन्य परिचालन संसाधन (Operational Resources) अब ‘अभिजीत रियल्टर्स’ के पास चले जाएंगे। हालांकि, इस व्यापारिक समझौते को पूरी तरह लागू करने से पहले संबंधित सरकारी मंत्रालयों और नियामकीय संस्थाओं (Regulatory Authorities) से अंतिम मंजूरी मिलना अभी बाकी है।

​संकट में पारंपरिक रेडियो उद्योग: कारण और चुनौतियाँ

​रेडियो मिर्ची का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पूरा निजी एफएम रेडियो उद्योग एक अभूतपूर्व दौर से गुजर रहा है। इस संकट के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण हैं:

  • डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से कड़ी टक्कर: स्पॉटिफ़ाई (Spotify), जियोसावन (JioSaavn), यूट्यूब म्यूजिक जैसे डिजिटल ऑडियो स्ट्रीमिंग ऐप्स और पॉडकास्ट के बढ़ते चलन ने पारंपरिक रेडियो के श्रोताओं (Listeners) को अपनी ओर खींचा है।
  • विज्ञापन आय में गिरावट: डिजिटल विज्ञापन की ओर कंपनियों का झुकाव बढ़ने के कारण पारंपरिक एफएम चैनलों की विज्ञापन से होने वाली कमाई (Ad Revenue) में भारी कमी आई है।

​इसी आर्थिक दबाव के कारण हाल के महीनों में कई बड़ी रेडियो कंपनियों को या तो अपने स्टेशन बंद करने पड़े हैं या फिर वे अपने बिजनेस मॉडल का पुनर्गठन (Restructuring) कर रही हैं।

​दबदबा अब भी कायम: TRAI के आंकड़े

​भले ही कंपनी ने तीन शहरों से अपना हाथ खींचा है, लेकिन बाजार में इसकी पकड़ अब भी सबसे मजबूत है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक:

​”रेडियो मिर्ची देश का सबसे बड़ा निजी एफएम नेटवर्क बना हुआ है। वर्तमान में इसके पास कुल 73 एफएम चैनल हैं, जो भारत के किसी भी अन्य निजी रेडियो नेटवर्क की तुलना में सबसे अधिक हैं।”

 

​विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी का यह कदम पीछे हटना नहीं, बल्कि अपने पूरे बिजनेस को अधिक प्रभावी और लाभदायक (Profitable) बनाने की एक सोची-समझी रणनीति है।

​पूरे सेक्टर में री-स्ट्रक्चरिंग का दौर

​रेडियो मिर्ची अकेले इस रास्ते पर नहीं है। हाल ही में एक और बड़े मीडिया घराने एचटी मीडिया (HT Media) ने भी घाटे और मंदी के चलते अपने पांच एफएम स्टेशनों को पूरी तरह बंद कर दिया था। इसके अलावा अन्य प्रमुख रेडियो नेटवर्क भी खर्चों में कटौती और नए कारोबारी मॉडल की तलाश में जुटे हैं।

निष्कर्ष: डिजिटल युग के इस दौर में सर्वाइवल (अस्तित्व बचाए रखने) के लिए पारंपरिक एफएम रेडियो उद्योग को नए सिरे से खुद को ढालना पड़ रहा है। मिर्ची का यह सौदा इसी बदलाव की एक बानगी है।

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Author: media4samachar

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