लखनऊ / जालौन: उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्था में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब सूबे के एक तेजतर्रार दलित IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही की एक चिट्ठी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। इस पत्र ने सीधे तौर पर योगी सरकार के सबसे रसूखदार मंत्रियों में शुमार स्वतंत्र देव सिंह को कटघरे में खड़ा कर दिया है। नियुक्ति विभाग को लिखी गई इस चिट्ठी में IAS अधिकारी ने न सिर्फ मंत्री के नाम पर अवैध कब्जे के गंभीर आरोप लगाए हैं, बल्कि सिस्टम के खिलाफ विरोध जताते हुए आधा वेतन ही लेने की अनोखी मांग कर डाली है।


चिट्ठी के वो दो बिंदु, जिन्होंने मचाया हड़कंप
IAS रिंकू सिंह राही द्वारा नियुक्ति विभाग को भेजे गए पत्र के दो बिंदुओं ने प्रशासनिक गलियारों में खलबली मचा दी है:
- बिंदु संख्या 1.5: अधिकारी ने साफ तौर पर लिखा है कि कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के नाम पर कराए जा रहे कथित अवैध कब्जे की जांच को रोकने के मकसद से उनके खिलाफ षड्यंत्रपूर्वक विवाद खड़ा किया गया।
- बिंदु संख्या 1.9: पत्र में आगे कहा गया है कि यदि स्वतंत्र देव सिंह के नाम का प्रयोग कर जालौन में किए जा रहे अवैध कब्जे की जांच और कोल्ड स्टोरेज के दस्तावेज प्रस्तुत करने के बाद उनका स्थानांतरण (तबादला) किया जाता, तो यह उनका मनोबल तोड़ने वाला नहीं होता।
जालौन से पुराना है विवादों का नाता
गौरतलब है कि जालौन जिला मंत्री स्वतंत्र देव सिंह की कर्मभूमि रहा है। यह पहला मौका नहीं है जब जालौन प्रशासन और मंत्री का परिवार चर्चा में आया हो। पिछले साल अगस्त में मंत्री के बेटे अभिषेक सिंह उर्फ राजा भैया का एक मामला बेहद चर्चित हुआ था, जिसमें आरोप लगे थे कि बिना किसी आधिकारिक या संवैधानिक पद के होने के बावजूद जिला प्रशासन ने उन्हें ‘वीआईपी प्रोटोकॉल’ दिया था। IAS राही की इस चिट्ठी ने उस पुराने विवाद को एक बार फिर जिंदा कर दिया है।
सिस्टम के खिलाफ अनोखा विरोध: ‘काम नहीं, तो पूरा वेतन नहीं’
आमतौर पर प्रताड़ना या विवादों के बाद अधिकारी छुट्टी पर चले जाते हैं या कानूनी रास्ता अख्तियार करते हैं, लेकिन IAS रिंकू सिंह राही ने व्यवस्था पर नैतिक दबाव बनाने के लिए एक अभूतपूर्व कदम उठाया है। उन्होंने साफ कहा है कि बिना काम के वह पूरा वेतन नहीं लेंगे। उन्होंने विभाग से मांग की है कि उनका सिर्फ आधा वेतन ही आहरित (रिलीज) किया जाए। इस कदम को ब्यूरोक्रेसी में एक बेहद कड़ा और अनोखा संदेश माना जा रहा है।
सियासी और प्रशासनिक हलकों में बढ़ी तपिश
इस चिट्ठी के सोशल मीडिया पर सार्वजनिक होते ही उत्तर प्रदेश की राजनीति में उबाल आ गया है। एक दलित IAS अधिकारी द्वारा सरकार के एक बेहद करीबी और कद्दावर ओबीसी चेहरे पर इस तरह के सीधे आरोप लगाना सरकार के लिए असहज करने वाली स्थिति पैदा कर रहा है।
विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर हमलावर है। प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज है कि कश्ती वाकई भंवर में है और आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर यूपी की सियासत में एक बड़ा तूफान खड़ा होना तय है। अब हर किसी की नजर इस बात पर टिकी है कि शासन इस गंभीर पत्र पर क्या रुख अपनाता है।





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