मीडिया जगत से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। प्रतिष्ठित मीडिया हाउस इंडिया टुडे ग्रुप (TV Today Network) में बड़े पैमाने पर छंटनी की गई है। 20 जुलाई से 24 जुलाई के बीच समूह के लगभग 120 से अधिक कर्मचारियों को अचानक नौकरी से निकाल दिया गया या उनसे जबरन इस्तीफा ले लिया गया। इस कार्रवाई से मीडिया गलियारों में हड़कंप मच गया है।
कैसे दिया गया छंटनी को अंजाम?
पीड़ित कर्मचारियों के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई बेहद सुनियोजित और चौंकाने वाली थी। नोएडा सेक्टर-16 स्थित टीवी टुडे नेटवर्क के दफ्तर में काम कर रहे कर्मचारियों को उनकी शिफ्ट खत्म होने से कुछ घंटे पहले एचआर विभाग द्वारा केबिन में बुलाया गया।
‘आज तक’ हिंदी वेबसाइट के साथ पिछले दो साल से जुड़े एक कर्मचारी (बदला हुआ नाम- अनमोल कुमार महतो) ने बताया कि उनकी शिफ्ट खत्म होने में जब एक घंटा बचा था, तब उन्हें एचआर प्रतिनिधि बबिता और उनके मैनेजर के पास बुलाया गया। उनसे कहा गया कि “आज आपका आखिरी दिन है, आप अपना इस्तीफा दे दीजिए।”
जब अनमोल ने कारण जानना चाहा और पूछा कि क्या उनके काम में कोई कमी है, तो एचआर मैनेजर ने जवाब दिया, “नहीं, आपके काम में कोई कमी नहीं है, हम रीस्ट्रक्चरिंग (पुनर्गठन) कर रहे हैं।” उस समय एचआर के पास फुल एंड फाइनल से जुड़े दस्तावेज पहले से तैयार थे। फौरन उनका लैपटॉप और आई-कार्ड जमा करवाकर उन्हें दफ्तर से बाहर कर दिया गया।
कौन-कौन से विभाग हुए प्रभावित?
इस छंटनी की सबसे ज्यादा मार ‘आज तक’ हिंदी वेबसाइट पर पड़ी है, जहां बड़ी संख्या में पत्रकारों को हटाया गया है। इसके अलावा निम्नलिखित विभागों के कर्मचारी भी इसकी चपेट में आए हैं:
कैमरामैन और वीडियो एडिटर्स
ग्राफिक्स और फैक्ट-चेक टीम
डाटा इंटेलिजेंस यूनिट (DIU)
‘आज तक रेडियो’ और अन्य सहयोगी विंग
13-15 साल पुराने कर्मचारी भी हुए बाहर
यह छंटनी सिर्फ नए कर्मचारियों तक सीमित नहीं थी, बल्कि संस्थान को लंबी सेवाएं देने वाले दिग्गज भी इसका शिकार बने। राजू देव (बदला नाम), जो पिछले 13 साल से ‘आज तक’ हिंदी से जुड़े थे, उन्होंने बताया कि वे सामान्य दिनों की तरह अपना काम कर रहे थे, तभी उन्हें नीचे बुलाया गया और इस्तीफा देने को कहा गया।
राजू ने दर्द बयां करते हुए कहा, “मैंने अपने जीवन के 13 साल से ज्यादा इस संस्थान को दिए, लेकिन मुझे अपने साथियों से मिलने तक नहीं दिया गया। जिस संस्थान को अपनी जवानी दे दी, वहां से इतनी उपेक्षा की उम्मीद नहीं थी।”
इसी तरह 4 साल से कार्यरत नैना राजपूत (बदला नाम) और अन्य कई पुराने कर्मचारियों के साथ भी यही रवैया अपनाया गया। जिन कर्मचारियों ने इस्तीफा देने से इनकार किया, उन्हें तुरंत बर्खास्त (टर्मिनेट) कर दिया गया।
थर्ड-पार्टी ऐप ‘केका’ के जरिए लिए गए इस्तीफे
यह पूरी प्रक्रिया एचआर प्लेटफॉर्म ‘केका’ (Keka) के माध्यम से पूरी की गई। यह एक थर्ड-पार्टी सर्विस है जिसका इस्तेमाल कंपनियां एचआर कार्यों के लिए करती हैं। इस पोर्टल पर कर्मचारियों से अलग-अलग विकल्प चुनवाए गए—किसी ने ‘रीस्ट्रक्चरिंग’ तो किसी ने ‘अदर्स’ का विकल्प चुना। कई कर्मचारियों ने स्पष्ट रूप से लिखा कि उनसे प्रबंधन के दबाव में इस्तीफा लिया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, जिन कर्मचारियों ने इस्तीफा दिया, उन्हें दो महीने की सैलरी एडवांस में दी गई है, जबकि जिन्हें बर्खास्त किया गया है, उन्हें केवल दो महीने का बेसिक वेतन दिया जाना तय हुआ है।
छंटनी की असली वजह: घाटे में चल रहा है समूह?
जब कर्मचारियों ने ‘रीस्ट्रक्चरिंग’ के इस तर्क पर सवाल उठाया, तो अंदरखाने से यह बात सामने आई कि कंपनी गंभीर आर्थिक दबाव और घाटे का सामना कर रही है।
गौर करने वाली बात यह है कि आज तक और इंडिया टुडे जैसे बड़े ब्रांड चलाने वाली कंपनी के मुनाफे में पिछले वित्त वर्ष के दौरान भारी गिरावट दर्ज की गई थी। कंपनी का सालाना नेट प्रॉफिट 81 प्रतिशत घटकर मात्र 14 करोड़ रुपये के आसपास रह गया था। इसके अलावा कंपनी का कुल रेवेन्यू भी 19 प्रतिशत गिरकर करीब 807 करोड़ रुपये पर आ गया था। विज्ञापनों से घटती कमाई, रीस्ट्रक्चरिंग की लागत और रेडियो बिजनेस से हुआ नुकसान इसके मुख्य कारणों में गिनाए जा रहे हैं।
कर्मचारियों का यह भी आरोप है कि इस छंटनी में मुख्य रूप से उन लोगों को निशाना बनाया गया है जो अपेक्षाकृत कम वेतन (लगभग 25-30 हजार रुपये मासिक) पर काम कर रहे थे।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी कार्रवाई
यह इस साल का पहला मामला नहीं है। इससे पहले मई के अंतिम सप्ताह में ‘इंडिया टुडे’ पत्रिका से जुड़े छह पत्रकारों को भी इसी तरह हटाया गया था।





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