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लखनऊ में पत्रकार अभिषेक उपाध्याय पर FIR दर्ज,जातिगत और संप्रदायिक वैमनस्य फैलाने का आरोप

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लखनऊ। राजधानी लखनऊ में पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के खिलाफ डिजिटल माध्यमों और सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने के गंभीर आरोपों में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता अधिवक्ता सौरभ सिंह की तहरीर पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

​सामाजिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का आरोप

​दर्ज एफआईआर के अनुसार, अभिषेक उपाध्याय के डिजिटल चैनल ‘टॉप सीक्रेट’ पर कई ऐसी सामग्री प्रसारित की गई, जिससे समुदायों और विभिन्न जातियों के बीच वैमनस्य बढ़ने, सामाजिक ताना-बाना छिन्न-भिन्न होने तथा कानून-व्यवस्था पर विपरीत असर पड़ने की प्रबल आशंका जताई गई है।

​दस्तावेज में आरोप लगाया गया है कि चैनल पर एक विशेष समुदाय और जाति को निशाना बनाते हुए लगातार आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं।

​फरवरी से अप्रैल तक के वीडियो का हवाला

​प्राथमिकी में आरोपी द्वारा प्रसारित की गई सामग्री का उल्लेख करते हुए कई तिथियों को दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता के मुताबिक:

  • 9 फरवरी, 19 फरवरी और 24 फरवरी
  • 7 मार्च, 10 मार्च, 14 मार्च, 24 मार्च और 26 मार्च
  • 7 अप्रैल

​इन तिथियों में प्रसारित पोस्ट और वीडियो को सामाजिक तनाव और समुदायों के बीच विभाजन पैदा करने का जरिया बताया गया है।

​’Mens Rea’ और नोटिस की अनदेखी

​शिकायतकर्ता ने एफआईआर में कहा है कि विवादित सामग्री को लेकर आरोपी को पहले भी कानूनी नोटिस और चेतावनियां दी गई थीं। इसके बावजूद आपत्तिजनक पोस्ट और वीडियो का प्रसारण जारी रखा गया। शिकायत में दावा किया गया है कि चेतावनी के बाद भी लगातार सामग्री प्रसारित करना आरोपी के ‘दुर्भावनापूर्ण इरादे’ (Mens Rea) को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

​किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?

​पुलिस ने एफआईआर में निम्नलिखित धाराओं और अधिनियमों के तहत कार्रवाई की बात कही है:

  1. भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023: धारा 192, 196, 299, 353, 356 और 352
  2. सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम, 2000: संबंधित डिजिटल अपराध धाराएं
  3. अन्य: प्रेस काउंसिल एक्ट, 1978 और पत्रकारिता के नैतिक मानकों के उल्लंघन का आरोप।

​अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कानूनी तर्क

​दस्तावेज में भारतीय संविधान के दायरे का भी उल्लेख किया गया है। एफआईआर में कहा गया है कि संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है, लेकिन यह अधिकार पूर्ण (Absolute) नहीं है। देश की प्रभुता, अखंडता और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए अनुच्छेद 19(2) के तहत इस पर उचित प्रतिबंध (Reasonable Restrictions) लागू होते हैं।

​आपत्तिजनक सामग्री हटाने और अकाउंट ब्लॉक करने की मांग

​अधिवक्ता सौरभ सिंह ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि:

  • ​’टॉप सीक्रेट’ चैनल और आरोपी के सोशल मीडिया अकाउंट्स से आपत्तिजनक सामग्री तुरंत हटाई जाए।
  • ​संबंधित खातों को बंद (Block) किया जाए।
  • ​भविष्य में इस तरह के फर्जी या आपत्तिजनक अकाउंट बनाने पर रोक लगाई जाए।
  • ​आरोपी के खिलाफ निष्पक्ष जांच कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।

​फिलहाल, पुलिस ने प्राथमिकी के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों और वीडियो सामग्री का तकनीकी विश्लेषण करने के बाद ही आगे की विधिक कार्रवाई की स्थिति साफ होगी।

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Author: media4samachar

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