नई दिल्ली/मुंबई केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने जी (ZEE) ग्रुप के संस्थापक और जी एंटरटेनमेंट के पूर्व चेयरमैन सुभाष चंद्रा के खिलाफ वित्तीय धोखाधड़ी के एक मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज की है। चंद्रा के अलावा एस्सेल ग्रुप से जुड़े तीन अन्य अधिकारियों—पंकज सुरोलिया, अमिश पांड्या और राजीव ढोलकिया को भी आरोपी बनाया गया है। यह आपराधिक कार्रवाई एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (LIC HFL) की लिखित शिकायत के आधार पर की गई है।
फर्जी नेटवर्थ दिखाकर लिया गया लोन
मामले की शुरुआत वर्ष 2018 में हुई थी, जब सुभाष चंद्रा ने ‘मेसर्स वसंत सागर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड’ और अपनी अन्य एस्सेल ग्रुप की कंपनियों के लिए कर्ज का आवेदन किया था। लोन मंजूर कराने के लिए उन्होंने एक व्यक्तिगत नेटवर्थ सर्टिफिकेट जमा किया, जिसमें उनकी व्यक्तिगत कुल संपत्ति ₹59,113 करोड़ दर्शाई गई थी।
इस विशालकाय वित्तीय आंकड़े को आधार मानते हुए LIC HFL ने कंपनियों को ₹1,322.39 करोड़ का लोन जारी कर दिया। हालांकि, बाद के वर्षों में जब कर्ज की किश्तें चुकाने में कंपनियां नाकाम रहीं, तो मामला दिवालिया प्रक्रिया तक पहुंच गया।
खुद की नेटवर्थ से मुकरे, 2024 में बताई ₹31.79 करोड़
जांच और कानूनी कार्यवाही के दौरान वित्तीय आंकड़ों का बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया:
- 2024 में वास्तविक संपत्ति: दिवालियापन (Insolvency) कार्यवाही के दौरान सुभाष चंद्रा ने शपथ पत्र दाखिल कर कहा कि उनकी वास्तविक व्यक्तिगत नेटवर्थ वर्ष 2024 में घटकर मात्र ₹31.79 करोड़ रह गई है।
- सर्टिफिकेट से इनकार: चंद्रा ने दावा किया कि 2017-18 में भी उनकी कुल संपत्ति कभी ₹40,000 करोड़ से अधिक नहीं थी और लोन लेते वक्त जमा किए गए ₹59,113 करोड़ के नेटवर्थ सर्टिफिकेट से पल्ला झाड़ लिया।
₹22,000 करोड़ की देनदारी और सेटलमेंट विवाद
दिवालिया प्रक्रिया के तहत सुभाष चंद्रा ने लेनदारों के सामने अपनी कंपनियों की कुल ₹22,000 करोड़ की देनदारी को निपटाने के लिए केवल ₹6.5 करोड़ के सेटलमेंट का प्रस्ताव रखा था।
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की सिंगल बेंच ने शुरुआत में इस रीपेमेंट प्लान को मंजूरी दे दी थी। इस प्लान के तहत LIC HFL को उसके ₹1,322 करोड़ के बकाए के बदले मात्र ₹38.09 लाख मिलने का प्रावधान था।
LIC HFL द्वारा इस एकतरफा व्यवस्था का कड़ा विरोध किए जाने के बाद NCLT के इतिहास में पहली बार 5 सदस्यों वाली विशेष बेंच का गठन किया गया, जिसने इस रीपेमेंट प्लान के अमल पर फिलहाल रोक लगा रखी है।
दर्ज की गई आपराधिक धाराएं
CBI ने आरोपियों के खिलाफ वर्ष 2018 से 2026 की अवधि के दौरान किए गए वित्तीय अपराधों को लेकर मामला दर्ज किया है। चारों आरोपियों पर निम्नलिखित गंभीर आरोप लगाए गए हैं:
- धोखाधड़ी (Cheating)
- अमानत में खयानत (Criminal Breach of Trust)
- आपराधिक साजिश रचना (Criminal Conspiracy)
- फर्जी दस्तावेज जमा करना (Submission of Falsified Documents)
CBI अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे मामले से जुड़े दस्तावेज जब्त किए जा चुके हैं और जल्द ही संबंधित अधिकारियों व आरोपियों को पूछताछ के लिए समन भेजा जाएगा।



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