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साधना मीडिया समूह के शेयर घोटाले में इन पर सेबी की बड़ी कार्रवाई,मामले के मास्टर माइंड चैनल मालिक राकेश गुप्ता व अन्य सभी शामिल

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साधना ब्रॉडकास्ट (अब क्रिस्टल बिज़नेस सिस्टम लिमिटेड) से जुड़ी शेयर बाज़ार में भारी हेराफेरी के मामले में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने गुरुवार को बॉलीवुड अभिनेता अरशद वारसी, उनकी पत्नी मारिया गोरेटी समेत कुल 59 लोगों को शेयर बाजार से 1 से 5 वर्षों तक प्रतिबंधित कर दिया। इसके साथ ही अरशद और मारिया पर 5-5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सेबी की जांच में सामने आया कि इन दोनों ने साधना ब्रॉडकास्ट के शेयरों में निवेश कर लाभ कमाया था, जहां अरशद को 41.70 लाख और मारिया को 50.35 लाख रुपये का मुनाफा हुआ। इस घोटाले में कुल 58.01 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की गई थी, जिसे अब सेबी ने 12% सालाना ब्याज के साथ वापस लौटाने का निर्देश दिया है।

दो चरणों में चला घोटाला

सेबी की 109 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरे घोटाले को दो चरणों में अंजाम दिया गया। पहले चरण में, कंपनी से जुड़े लोगों और प्रमोटरों ने आपस में सौदे कर शेयर की कीमतें कृत्रिम रूप से बढ़ाईं। यह सौदे कम मात्रा में थे लेकिन तरलता (liquidity) कम होने की वजह से इनका असर कीमतों पर ज्यादा पड़ा।

दूसरे चरण में, YouTube चैनलों — मनीवाइज़, द एडवाइज़र और प्रॉफिट यात्रा — पर भ्रामक वीडियो अपलोड किए गए। इन वीडियो में साधना ब्रॉडकास्ट को एक लाभकारी निवेश अवसर के रूप में पेश किया गया, जिससे आम निवेशकों को गुमराह किया गया। इन चैनलों का संचालन मनीष मिश्रा कर रहे थे।

सेबी की रिपोर्ट में इस पूरे षड्यंत्र के मुख्य योजनाकारों के रूप में गौरव गुप्ता, राकेश कुमार गुप्ता और मनीष मिश्रा को नामित किया गया है। सुभाष अग्रवाल, जो कंपनी के रजिस्ट्रार एंड ट्रांसफर एजेंट (RTA) के निदेशक भी थे, ने मनीष मिश्रा और प्रमोटरों के बीच सेतु का काम किया।

इसके अलावा, पीयूष अग्रवाल (डीलर, चॉइस ब्रोकिंग में) और लोकेश शाह (दिल्ली फ्रैंचाइज़ मालिक) ने भी इस स्कीम को सफल बनाने के लिए अपने खातों का इस्तेमाल करने की अनुमति दी।

घोटाले से जुड़ी शिकायतें जुलाई से सितंबर 2022 के बीच सेबी को मिली थीं, जिनमें आरोप था कि शेयर की कीमतों में हेराफेरी कर के YouTube पर पेड मार्केटिंग कैंपेन के ज़रिए आम निवेशकों को ठगा गया। सेबी ने 2 मार्च 2023 को 31 संस्थाओं के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी किया था। इसके बाद मार्च 8 से नवंबर 30, 2022 तक के घटनाक्रम की गहन जांच की गई।

सेबी ने स्पष्ट किया है कि इस स्कीम में कुछ लोग केवल जानकारी वाहक या ट्रेड प्लेसर के रूप में जुड़े थे, जबकि अन्य ने लाभ कमाने के लिए सीधे ट्रेडिंग की।

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Author: media4samachar

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