नई दिल्ली। WhatsApp Business अब ‘मुफ्त और अनलिमिटेड’ ब्रॉडकास्टिंग का माध्यम नहीं रहा। जुलाई 2025 से लागू हुए नए ‘पे-पर-मैसेज’ मॉडल ने भारतीय कंपनियों के लिए एक नई चुनौती पेश कर दी है। 85 करोड़ से ज्यादा भारतीय यूजर्स और 1.5 करोड़ से अधिक बिजनेस अकाउंट्स वाले इस मंच पर अब हर ब्रांड को हर संदेश के लिए भुगतान करना होगा।
पहले जहां कंपनियां तय शुल्क पर अनलिमिटेड प्रमोशनल मैसेज भेजती थीं, वहीं अब उन्हें हर टेम्पलेट मैसेज की कीमत चुकानी होगी, जिससे मार्केटिंग बजट पर बड़ा असर पड़ने वाला है।
क्या है नया शुल्क ढांचा?
प्रमोशनल टेम्पलेट मैसेज: ₹0.78 प्रति मैसेज
यूटिलिटी व ऑथेंटिकेशन मैसेज: ₹0.11 प्रति मैसेज
30 करोड़+ यूटिलिटी मैसेज वाले ब्रांड्स के लिए: ₹0.08 प्रति मैसेज
ग्राहक द्वारा शुरू की गई चैट: 24 घंटे तक मुफ्त
Click-to-WhatsApp विज्ञापन से शुरू चैट: 72 घंटे तक मुफ्त
बल्क मैसेजिंग अब ‘बजट फ्रेंडली’ नहीं
Alpha Zegus के फाउंडर रोहित अग्रवाल कहते हैं, “₹0.78 का शुल्क तेजी से बजट खा सकता है। अब त्योहारों या abandoned cart रिमाइंडर जैसी सामान्य चीजों को भेजने से पहले ROI सोचना पड़ेगा।”
भारत में बिजनेस मैसेजिंग मार्केट का आकार बढ़ा, लेकिन लागत भी
Deloitte-IMAI की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का बिजनेस मैसेजिंग बाजार 2024 में $810 मिलियन से बढ़कर 2025 में $1.1 बिलियन से ज्यादा हो जाएगा। WhatsApp अब सिर्फ कम्युनिकेशन टूल नहीं, बल्कि इन्फ्रास्ट्रक्चर बन चुका है—और इन्फ्रास्ट्रक्चर मुफ्त नहीं होता।
“हर मैसेज अब मायने रखेगा”
Gozoop Group के चीफ ग्रोथ ऑफिसर अमयन घडियाली के अनुसार, “अब हर इंटरैक्शन की कीमत है, तो हर इंटरैक्शन को असरदार होना पड़ेगा। CRM, ब्रांड और टेक्नोलॉजी को एक साथ काम करना होगा।”
एक FMCG ब्रांड के मार्केटिंग हेड बताते हैं, “पहले मैसेजिंग सिर्फ स्केल थी, अब यह प्रासंगिकता और व्यक्तिगत तालमेल का खेल है। हम अब त्योहारों के ब्रॉडकास्ट की बजाय हाइपर-लोकल टारगेटिंग कर रहे हैं।”
‘कम नहीं, बेहतर’ की ओर रुख
अब स्पैमिंग के बजाय माइक्रो-जर्नी, टाइम-सेंसिटिव कंटेंट और पर्सनलाइज्ड अनुभवों की जरूरत होगी। “आप अब इंप्रेशन नहीं, इरादा खरीद रहे हैं,” घडियाली कहते हैं।
छोटे ब्रांड्स पर असर, बड़े ब्रांड्स के लिए अवसर
Mobupps के CEO यारोन टॉमचिन मानते हैं कि बड़े ब्रांड्स अपने MarTech और डेटा सेटअप के चलते जल्दी ढल जाएंगे, लेकिन छोटे D2C ब्रांड्स के लिए यह बदलाव चुनौतीपूर्ण होगा। “अगर ROI नहीं मिला, तो ये ब्रांड SMS, Email या RCS पर लौट सकते हैं।”
एट्रिब्यूशन और मेजरमेंट एक नई उलझन
टॉमचिन का मानना है कि WhatsApp के भीतर चल रहे कैंपेन को Meta Ads या ईमेल फनल से जोड़कर मापना अभी भी मुश्किल है। WhatsApp एक वॉल्ड गार्डन बना हुआ है।
Meta की नजर भारत पर, ग्रोथ रिकॉर्ड तोड़ी
2025 की पहली छमाही में Meta का WhatsApp बिजनेस रेवेन्यू $1.6 बिलियन पार कर गया है, जिसमें भारत सबसे तेज़ी से बढ़ता बाजार बना है। eMarketer के मुताबिक, भारत में WhatsApp मैसेज पर रिस्पॉन्स की खरीदारी दर ईमेल से 3.5 गुना ज्यादा है।
टाइमिंग ही सबकुछ
एक देसी फैशन ब्रांड के डिजिटल हेड कहते हैं, “अब WhatsApp कैंपेन सिर्फ मार्केटिंग कैलेंडर नहीं, बल्कि इन्वेंटरी मूवमेंट से जुड़ा है। हर मैसेज को पहले टैप में कन्वर्ट करना जरूरी है।”
AI से मिलेगा पर्सनल टच
ब्रांड्स अब AI की मदद से मैसेज को पर्सनलाइज़ कर रहे हैं—जैसे ग्राहक का नाम, पिछली खरीदारी, दिन का समय आदि जोड़कर मैसेज को मानव जैसा रूप देना।
“रोबोटिक मैसेज अब ब्लॉक कर दिए जाते हैं,” रोहित अग्रवाल चेताते हैं।
72 घंटे की विंडो अब ‘गोल्ड’
ब्रांड्स इस विंडो में लॉयल्टी प्रोग्राम, शॉपेबल मैसेज और गेमिफाइड ऑफर की टेस्टिंग कर रहे हैं। “जो पहला टैप ट्रिगर कर दे, वहीं से पूरा अपसेल, रिटेंशन और रेफरल का खेल फ्री में चल सकता है,” टॉमचिन कहते हैं।
भारत में मैसेजिंग की जटिलता
LS Digital के VP निखिल खत्री के मुताबिक, भारत की भाषाई विविधता, साक्षरता और डेटा असमानता ने WhatsApp मैसेजिंग को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। ब्रांड्स अब वॉइस नोट्स, वीडियो और लोकल भाषा वाले हाइब्रिड चैटबॉट्स का सहारा ले रहे हैं।
“टियर-2 शहरों में वॉइस AI का असर शानदार है,” घडियाली कहते हैं।
नया WhatsApp: नीतियों से नहीं, रणनीतियों से जीतो
WhatsApp अब एक प्रीमियम चैनल है—और हर ब्रांड को इसे वैसी ही प्राथमिकता देनी होगी। जिनके पास स्मार्ट सेगमेंटेशन, रिलेटेबल कंटेंट और सटीक प्लानिंग होगी, वे आगे निकलेंगे। बाकी को ब्लॉक या इग्नोर किया जाना तय है।



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