एड.संजीव त्रिवेदी (लीगल कंसलटेंट) Media4samachar
वरिष्ठ अधिवक्ता हाइकोर्ट & सुप्रीम कोर्ट
क्या आप जानते हैं?
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट कहा है कि- “किसी व्यक्ति को बिना जांच के बदनाम करना उसके मौलिक अधिकारों (Article 21 – Right to Life) का उल्लंघन है, क्योंकि ‘सम्मान’ जीवन का हिस्सा है।”
आज के समय की सच्चाई
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हमारे देश में यह आम बात हो चुकी है कि —
किसी व्यक्ति को झूठे केस में फँसाकर,
पहले पुलिस द्वारा गिरफ्तारी,
और फिर मीडिया ट्रायल के ज़रिए
उसकी सार्वजनिक छवि और सामाजिक प्रतिष्ठा को पूरी तरह बर्बाद कर दिया जाता है।
इसलिए, भविष्य में आप या आपके किसी शुभचिंतक/परिजनों के साथ ऐसी कोई घटना न हो, इसके लिए इस जानकारी को पढ़िए, समझिए और ज़रूरत लगे तो अपने पास सुरक्षित रखिए।
क्योंकि, एक स्वाभिमानी व्यक्ति के लिए
उसकी इज़्ज़त और मान-सम्मान से बढ़कर कोई दौलत नहीं होती।
✅ ध्यान रखे कि, अगर आप झूठे केस में फँस जाएँ और आपकी छवि खराब की जाए, तो आपके पास कानूनी और सामाजिक दोनों स्तरों पर अधिकार एवं उपाय मौजूद हैं:
1. तत्काल कानूनी सहायता लें
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• किसी अनुभवी क्रिमिनल वकील से संपर्क करें।
• अगर मामला फर्ज़ी है तो हाईकोर्ट में याचिका देकर FIR रद्द कराने की प्रक्रिया शुरू करें।
• अगर गिरफ्तारी न हुई हो तो अग्रिम जमानत (Bail) हेतु न्यायालय में याचिका दायर करें।
• निर्दोष साबित होने पर किसी अच्छे वकील के सहयोग से संबंधित व्यक्ति/ पुलिस अधिकारी के ख़िलाफ़ आपराधिक धराओं में मुक़दमा दर्ज करे।
2. मानहानि का मुकदमा करें
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• अगर किसी चैनल, अख़बार या व्यक्ति ने बिना पुष्टि के आपकी छवि को नुकसान पहुँचाया है तो सबसे पहले उन्हें साक्ष्यों सहित पत्र भेजकर उपरोक्त समाचार पत्र/ न्यूज़ चैनल/ यूट्यूब चैनल पर आपके खिलाफ बिना पुष्टि के ख़बर प्रकाशित/ प्रसारित करने संबंधित माफीनामा प्रकाशित/ प्रसारित करने के संबंध में अनुरोध/ निर्देशित करें।
• अगर संबंधित खबर उस पर समाचार पत्र/ न्यूज़ चैनल/ यूट्यूब चैनल द्वारा माफीनामा प्रकाशित/ प्रसारित नहीं किया जाता है तो उसके न्यायालय में आपराधिक एवं मानहानि केस दर्ज करें।
• आप सिविल डिफेमेशन के तहत संबंधित समाचार पत्र/ चैनल/ यूट्यूब चैनल से हर्जाने की भी माँग भी कर सकते है।
• अगर कोई मीडिया संस्थान झूठी/भ्रामक खबर प्रकाशित करता है तो प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की वेबसाइट पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।
• पुलिस द्वारा दर्ज FIR, गिरफ्तारी प्रक्रिया और जांच दस्तावेज़ RTI के ज़रिए मँगवाएं। ये दस्तावेज़ आपके पक्ष में साक्ष्य बन सकते हैं।
• अगर पुलिस ने गिरफ्तारी में अधिकारों का उल्लंघन किया है तो राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) या राज्य मानवाधिकार आयोग में शिकायत करें।
• पब्लिक क्लैरिफिकेशन के उद्देश्य से मीडिया चैनल, अखबार या सोशल मीडिया के माध्यम से शालीनता से अपना पक्ष सार्वजनिक करें।
✋ ध्यान रखें:
चुप मत बैठिए — हर नागरिक को इंसाफ और सम्मान पाने का अधिकार है।
अगर मामला किसी संगठित गिरोह या पुलिस-मीडिया मिलीभगत का है तो CBI जांच, या राज्य सतर्कता आयोग (Vigilance) में शिकायत कर सकते हैं।




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