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सहारा मीडिया कर्मियों के बकाया वेतन का मुद्दा वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप राय ने सुप्रीम कोर्ट में रखा पक्ष

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नई दिल्ली- राष्ट्रीय सहारा समूह के
विभिन्न मीडिया यूनिटों के कर्मचारियों को कई वर्षों से बकाया वेतन, अन्य देय भत्ते और उनकी जमा पूंजी निकालने में अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या की गंभीरता को देखते हुए, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप राय ने यह मामला मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई की अदालत में उठाया है। कर्मचारियों की आशा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश से यह लंबित देयताएँ उन्हें जल्द मिल जाएँगी।

मामला क्या है?

राष्ट्रीय सहारा समूह के कई मीडिया कर्मियों ने आरोप लगाया है कि उन्हें लंबे समय से वेतन, बोनस, सेवा अवकाश भुगतान और अन्य वित्तीय देयताओं की राशि नहीं दी गई है। कर्मचारियों ने यह भी कहा है कि उनकी जमा पूँजी (पेंशन, भविष्य निधि आदि) निकालने में भी प्रबंधन द्वारा विलंब किया गया है। यह समस्या समय-समय पर मीडिया और कर्मी संघों द्वारा उठाई जाती रही है, लेकिन अब मामला सुप्रीम कोर्ट स्तर पर पहुँच गया है। खबरों के एक स्रोत में यह उल्लेख है कि सहारा समूह ने 457 कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति भुगतान सहित अन्य देयताओं के लिए सुप्रीम कोर्ट से ₹15.98 करोड़ जारी करने का आदेश माँगा है।

सुप्रीम कोर्ट में दायित्व / दलीलें

वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप राय इस मामले में कर्मचारियों की ओर से सशक्त पैरवी कर रहे हैं और न्यायालय से मांग कर रहे हैं कि लंबित वेतन एवं अन्य बकाया राशि सेबी (SEBI) खाते या अन्य सुनिश्चित स्रोतों से जारी करने का आदेश दिया जाए।

कोर्ट में यह तर्क रखा गया है कि कर्मचारियों की आजीविका संबद्ध देयताएँ समय रहते न मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हुई है, और यह प्रशासनिक एवं संवैधानिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। यदि न्यायालय कर्मचारियों के पक्ष में आदेश देता है, तो कंपनी को निर्देश दिया जाएगा कि उपयुक्त वित्तीय व्यवस्था कर देय राशि कर्मचारियों को वितरित करे।

यदि सर्वोच्च न्यायालय कर्मचारियों के पक्ष में निर्णय देता है, तो यह एक रास्ता खोलेगा कि मीडिया यादव ने सिर्फ़ अनुबंध कर्मचारियों के लिए नहीं, बल्कि नियमित कर्मचारियों के देय बुनियादी अधिकारों के लिए भी संघर्ष किया जाए। कोर्ट का आदेश यदि सहारा समूह पर लागू होता है, तो इसे लागू करना और प्रवर्तन करना एक चुनौती होगी, खासकर यदि समूह की वित्तीय स्थिति उतनी सुदृढ़ न हो। यह मामला मीडिया उद्योग में अन्य समूहों द्वारा कर्मचारियों के देय भुगतान के मामलों के लिए एक नजीर (precedent) बन सकता है। दुर्भाग्य से, अभी तक मीडिया रिपोर्टिंग में इस केस से जुड़े सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

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Author: media4samachar

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