जीनत सिद्दीकी-
एक न्यूज़ चैनल का संपादक अंतरिम ज़मानत पर बाहर है…मतलब जिसने कंपनी में जांच के नाम पर केवल महिला एंकर का शोषण किया वो अब कोर्ट में अपराधी की तरह खड़ा रहता है…ख़ैर
माननीय संपादक महोदय पर आरोप तो जान लीजिए…
महिला एंकर को परेशान करना-कई मौकों पर महिला एंकर को अंकफर्टेबल करना-नौकरी के बदले यौन शोषण का प्रयास करना..बात न मानने पर डराना धमकाना-तरह-तरह से परेशान करना..समेत कई गंभीर आरोप शामिल हैं ।
थोड़ा सा इतिहास संपादक जी का…
आदतन चरित्रहीन संपादक महोदय ने वैसे तो पुराने केस की तरह इस बार भी कंपनी में अपनी पावर का इस्तेमाल कर जांच होने नहीं दी थी..पुराने मामले की तरह फिर साज़िशें रची..महीनों जांच के बहाने एंकर का मानसिक शोषण किया और करवाया.. जब एंकर ने हार नहीं मानी तो जानलेवा माहौल बना कर ..गुंडों का सहारा लेकर ..ज़बरदस्त घेरेबंदी कर..महिला एंकर को नौकरी से निकलवाया।
लेकिन..लेकिन..लेकिन …कहानी बदली, कोर्ट ने न केवल केस को गंभीरता से स्वीकार किया बल्कि संपादक महोदय से कह दिया कि ये कंपनी नहीं कोर्ट है…और कोर्ट के सामने आना ही होगा…जांच का सामना भी करना होगा..और हर सवाल का जवाब भी देना होगा…अब संपादक जी कोर्ट भी आते हैं..कटघरे में घंटों खड़े भी रहते हैं…और सवालों का सामना भी करते हैं।
ग़ौर किया जाए…ये वही संपादक जी हैं ..जिन्होंने पहले भी लड़कियों को परेशान किया..इनके खिलाफ पहले भी शिकायत हुई..लेकिन ये जांच होने ही नहीं देते थे..बल्कि लड़कियों को परेशान करके नौकरी से निकलवा देते थे।
अब सवाल ये है कि कंपनी की ऐसी क्या मजबूरी है कि वो ऐसे महिला विरोधी-चरित्रहीन संपादक को गोद लिए हुए है…सोचिए….जिस केस को कोर्ट ने गंभीरता से लिया है..मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है..संपादक महोदय को कटघरे में खड़े रहना पड़ता है..उस केस की
कंपनी ने जांच करने की ज़हमत तक नहीं उठाई..,कोई तो बड़ा राज़ है…
ख़ैर.. कुछ वक्त के लिए सत्य परेशान हो सकता है पराजित नहीं।





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