रामदेव की कंपनी पतंजलि का घी खाने लायक नहीं?
खाद्य विभाग ने साफ कहा
-यह घी खाने लायक नहीं है
-सेवन करने पर बीमारी और साइड इफेक्ट हो सकते हैं
सौजन्य –

कहानी है सन 2020 की। एक ऐसा दौर जब राष्ट्रवाद चरम पर था। फिलहाल राष्ट्रवाद उतार पर है और एक समुदाय से नफरत अपने चरम पर। बात है बाबा रामदेव की। ओबीसी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले रामदेव, यादव जाति से आते हैं। लेकिन वे भगवा वस्त्र पहन कर एक लाख करोड़ से अधिक के धंधे में पैर पसार चुके थे। धर्म और अध्यात्म की शिक्षा देते हुए रामदेव ने धंधे पर ध्यान दे दिया। रामदेव ने धर्म की आड़ लेते हुए आम भारतीय जनता को नकली देसी घी पिला दिया। एक दो किलो नहीं, करोड़ों टन देसी घी।
2020 में शिकायत हुई। जांच हुई। जांच करते करते पांच साल बीत गए। तब तक पतंजलि ने करोड़ों भारतीयों की रसोई में नकली गाय का घी परोस दिया। 2025 में फैसला आया है। फैसले में लिखा है कि नकली घी बनाने वाली रामदेव की कंपनी पतंजलि पर 1 लाख (अरे बाप रे, इतना भयानक अर्थदंड) का जुर्माना लगाया जाए। इन पांच सालों में पतंजलि ने कितने लाख करोड़ लीटर देसी घी सनातनियों को पिला दिया होगा, इसकी भी जांच होनी चाहिए।
इस देश के हिंदुओं को अब्दुल के नाम पर डरा कर न जाने कितने बाबा रामदेव और पतंजलि अपना हित साध रहे हैं। मुसलमान वैसे भी पतंजलि का कोई सामान नहीं लेता, गौमूत्र की मिलावट की वजह से। बताइए नुकसान किसका और फायदा किसे हुआ।





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