नई दिल्ली में विश्व पुस्तक मेले 2026 का भव्य आगाज, BLF में भारत एक्सप्रेस के CMD उपेन्द्र राय ने पीएम-युवा स्कीम के तहत चुने गए युवा लेखकों को दिया संबोधन
नई दिल्ली, 10 जनवरी 2026 : नई दिल्ली के प्रगति मैदान में विश्व पुस्तक मेला 2026 का आज शनिवार, 10 जनवरी से आगाज हो गया. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इसका उद्घाटन किया. उद्घाटन समारोह के दौरान उन्होंने टैम्बोरिन बजाकर कार्यक्रम की शुरुआत की. यहीं भारत मंडपम आयोजित भारत लिटरेचर फेस्टिवल (बीएलएफ) के छठे सीजन ने साहित्य प्रेमियों और युवा लेखकों के बीच नई ऊर्जा का संचार किया. बीएलएफ में भारत एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क के चेयरमैन, मैनेजिंग डायरेक्टर एवं एडिटर-इन-चीफ (CMD) उपेन्द्र राय ने विशेष रूप से पीएम-युवा स्कीम के तहत चुने गए युवा लेखकों को संबोधित किया. उन्होंने ‘राष्ट्र निर्माण में युवा लेखकों की भूमिका’ विषय पर गहन एवं प्रेरणादायक विचार व्यक्त किए.
CMD उपेन्द्र राय ने अपने संबोधन की शुरुआत बच्चों के सहज स्वभाव से की. उन्होंने कहा, “दुनिया में कहीं भी जन्मा कोई भी बच्चा दो अनमोल गुण लेकर आता है – पहला, वह बिना किसी काम के भी व्यस्त रहता है और दूसरा, बिना किसी खास वजह के खुश रहता है. उसे खुश करने के लिए कोई विशेष आयोजन नहीं करना पड़ता.”
उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, समाज की मर्यादाएं, अपेक्षाएं और बोझ उसके मन पर हावी होने लगते हैं, जिससे सहजता धीरे-धीरे लुप्त हो जाती है और अहंकार का प्रवेश हो जाता है.
अहंकार और आत्मा की चर्चा करते हुए CMD उपेन्द्र राय ने जुड़वा बच्चों का रोचक उदाहरण दिया. “एक ही मां के गर्भ से जन्मे दो जुड़वा बच्चे एक ही समय में पैदा होते हैं, फिर भी एक बेहद सफल और दूसरा संघर्षशील क्यों बन जाता है? इसका उत्तर है – अलग-अलग संस्कारों वाली आत्माओं का प्रवेश. माता-पिता केवल शरीर का निर्माण करते हैं, आत्मा का रहस्य विज्ञान आज तक नहीं सुलझा पाया है.”
उन्होंने आगे कहा कि हमारे कर्म एक-एक करके आत्मा पर छाप छोड़ते हैं, जैसे एक रजिस्टर में प्रविष्टियां दर्ज होती हैं. यही कर्म आगे चलकर हमारे स्वभाव और जीवन दिशा को निर्धारित करते हैं.
जीवन का सर्वोच्च मूल्य है– स्वतंत्रता
CMD उपेन्द्र राय ने जोर देकर कहा कि “दुनिया के किसी भी कोने में, किसी भी युग में जीवन का सबसे बड़ा मूल्य स्वतंत्रता ही रहा है. यदि आपको अपनी बात कहने की, जीवन जीने की, कुछ नया सृजन करने की आजादी मिलती है, तो आप आधुनिक जीवन मूल्यों की सच्ची दिशा में अग्रसर हैं.”
बुद्ध, महावीर और कबीर के उदाहरण
बुद्ध, महावीर और कबीर जैसे महापुरुषों का उदाहरण देते हुए उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि इन्हीं महान आत्माओं को अपना आदर्श बनाएं. उन्होंने बुद्ध के अंतिम वादे का जिक्र किया कि वे मैत्रेय के रूप में पुनः आएंगे, लेकिन साढ़े तीन हजार वर्ष बीत जाने के बाद भी ऐसी महान आत्मा को धारण करने योग्य गर्भ नहीं मिला.
दौलत की सच्चाई पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “दौलत बाय-प्रोडक्ट है. कोई भी इसे कमा सकता है, लेकिन बुद्ध, महावीर, कबीर जैसे महापुरुष हजारों वर्षों में एक बार ही जन्म लेते हैं. यदि तराजू के एक पलड़े में इन महात्माओं को और दूसरे में सारी दुनिया की दौलत रखी जाए, तो हम बिना सोचे इन महापुरुषों के चरण स्पर्श करेंगे.”
शेर चोट खाकर भी टारगेट से नहीं चूकता
शेर और सपूत का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि शेर शिकार के लिए दौड़ते समय कांटों को नहीं देखता, चोट खाकर भी लक्ष्य पर अटल रहता है. इसी प्रकार सपूत संतान स्वयं धन का निर्माण कर लेती है, जबकि नालायक संतान पिता की सारी संपत्ति नष्ट कर देती है.
सफलता का मूल मंत्र है – सहजता
CMD उपेन्द्र राय ने युवा लेखकों को संदेश दिया कि “सहजता से जीवन सरल और सुंदर बनता है, जबकि कुटिलता अवसरों को छीन लेती है.” उन्होंने एक छोटी कहानी सुनाई कि कैसे एक साहूकार ज्यादा होशियारी दिखाने में बहुमूल्य हीरा खरीदने का अवसर गंवा बैठा.
पीएम-युवा स्कीम के तहत चयनित युवा लेखकों से विशेष संवाद में उन्होंने राष्ट्र निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया. उन्होंने कहा कि युवा लेखक समाज को दिशा देने वाले दीपक हैं. यदि वे स्वतंत्र चेतना, आध्यात्मिक गहराई और आधुनिक मूल्यों को अपनाते हैं, तो देश का भविष्य उज्ज्वल होगा.





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