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‘पंजाब केसरी’ ग्रुप के पीछे पड़ गई भगवंत मान सरकार,डायरेक्टर अविनाश चोपड़ा,अमित चोपड़ा समेत तीन पर दो-दो मुकदमे

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जालंधर: पंजाब की राजनीति और मीडिया जगत में उस वक्त हड़कंप मच गया जब राज्य की भगवंत मान सरकार और प्रतिष्ठित मीडिया समूह ‘पंजाब केसरी’ के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया। ताजा घटनाक्रम में, समूह के ज्वाइंट मैनेजिंग डायरेक्टरों—अविनाश चोपड़ा और अमित चोपड़ा—के खिलाफ जालंधर में एक ही रात में दो अलग-अलग आपराधिक मुकदमे दर्ज किए गए हैं।

क्या है पूरा मामला?

​मिली जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई 15 जनवरी की आधी रात को की गई। पुलिस ने जालंधर के दो अलग-अलग थानों में एफआईआर दर्ज की है:

  1. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई: पहला मामला थाना मकसूदां (जालंधर देहाती) में दर्ज हुआ है। यह केस पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की शिकायत पर प्रदूषण नियमों के उल्लंघन के आरोप में दर्ज किया गया है। इसमें अविनाश चोपड़ा के साथ एक कर्मचारी ऋषभ सोही को भी नामजद किया गया है।
  2. एक्साइज विभाग की रेड: दूसरा मामला थाना न्यू बारादरी में एक्साइज एक्ट के तहत दर्ज किया गया है। यह मामला समूह के स्वामित्व वाले ‘होटल पार्क प्लाजा’ पर आबकारी विभाग द्वारा की गई छापेमारी से जुड़ा है। इसमें अविनाश और अमित चोपड़ा दोनों को आरोपी बनाया गया है।

एफआईआर को ‘गोपनीय’ रखने के आरोप

​इस पूरे प्रकरण में सबसे ज्यादा चर्चा एफआईआर दर्ज करने के तरीके की हो रही है। सूत्रों और मीडिया संगठनों का दावा है कि इन एफआईआर को ऑनलाइन क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (CCTNS) पर सार्वजनिक नहीं किया गया, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि प्रशासन इस कार्रवाई को गुप्त रखना चाहता था।

सत्ता के दुरुपयोग का आरोप

​अखबार प्रबंधन और विभिन्न पत्रकार संगठनों ने इसे ‘लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला’ करार दिया है। प्रबंधन का तर्क है कि:

  • ​जिस वक्त की घटनाएं बताई जा रही हैं, उस समय समूह के डायरेक्टर्स संबंधित स्थानों पर मौजूद ही नहीं थे।
  • ​नियमों का उल्लंघन महज एक बहाना है, असली मकसद सरकार की आलोचना करने वाली पत्रकारिता को दबाना है।

निष्कर्ष

​पंजाब में पत्रकारों और मीडिया घरानों पर बढ़ते कानूनी मुकदमों ने एक बार फिर ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ पर बहस छेड़ दी है। जहाँ एक ओर सरकार इसे नियमों के पालन की कार्रवाई बता रही है, वहीं दूसरी ओर इसे राजनीतिक प्रतिशोध (Political Vendetta) के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला अदालत और राजनीतिक गलियारों में और तूल पकड़ सकता है।

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Author: media4samachar

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