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यह खबर मीडिया जगत में काफी चर्चा का विषय बनी हुई है। टेकराम ठाकुर जैसे अनुभवी पत्रकार का किसी संस्थान से इतने लंबे जुड़ाव के बाद अलग होना न केवल चैनल के लिए एक क्षति है, बल्कि यह मीडिया हाउस के भीतर के कामकाजी माहौल और नीतियों पर भी सवाल उठाता है।
उनकी बातों से कुछ महत्वपूर्ण बिंदु उभर कर सामने आते हैं:
- नीतियों से असंतुष्टि: टेकराम ठाकुर ने स्पष्ट किया है कि उनका इस्तीफा व्यक्तिगत कारणों से अधिक चैनल की आंतरिक नीतियों के विरोध में है।
- इस्तीफों का सिलसिला: मध्य प्रदेश हेड पुष्पेंद्र जी के जाने के बाद जिस तरह से अन्य रिपोर्टर्स ने भी चैनल छोड़ा है, वह एक “चेन रिएक्शन” की तरह नजर आ रहा है। यह दर्शाता है कि टीम के भीतर असंतोष गहरा हो सकता है।
- अनुभव की कमी: एक अनुभवी रिपोर्टर का जाना ग्राउंड रिपोर्टिंग की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां उनकी मजबूत पकड़ थी।
मीडिया में इस तरह के बदलाव अक्सर तब देखे जाते हैं जब संपादकीय स्वतंत्रता या कामकाजी शर्तों में बड़े बदलाव किए जाते हैं।





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