रायपुर: उत्तराखंड की धामी सरकार के बाद अब छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार भी मीडिया विज्ञापनों को लेकर विवादों के घेरे में आ गई है। आरटीआई (RTI) से मिली जानकारी के अनुसार, जनसंपर्क विभाग ने करोड़ों रुपये की “धनवर्षा” उन न्यूज़ चैनलों पर की है, जिनमें से अधिकतर का छत्तीसगढ़ में वजूद ही नहीं है।
क्या है पूरा मामला?
आरटीआई कार्यकर्ता कुणाल शुक्ला द्वारा साझा किए गए दस्तावेजों के अनुसार, छत्तीसगढ़ सरकार के जनसंपर्क विभाग ने अक्टूबर 2024 से दिसंबर 2024 के बीच कुल 67 न्यूज़ और टीवी चैनलों को विज्ञापनों का भुगतान किया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस छोटी सी अवधि में कुल 18 करोड़ 57 लाख रुपये का भुगतान किया गया।
प्रमुख आरोप और चौंकाने वाले तथ्य:
दिखते नहीं पर पैसे लेते हैं: कार्यकर्ताओं का दावा है कि छत्तीसगढ़ में आमतौर पर केवल 8 से 10 न्यूज़ चैनल ही प्रसारित होते हैं, लेकिन भुगतान 67 चैनलों को किया गया है।
बाहरी राज्यों का दखल: इस सूची में झारखंड, कश्मीर, उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा के चैनल शामिल हैं। सवाल उठ रहा है कि दूसरे राज्यों के क्षेत्रीय चैनलों पर विज्ञापन देकर छत्तीसगढ़ की जनता को क्या संदेश दिया जा रहा है?
अनाम कंपनियों की एंट्री: सूची में ओमेगा ब्रॉडकास्ट, संगीत ऑडियो, सौभाग्य मीडिया, सोफिया एंटरटेनमेंट और जयपुर मीडिया जैसे नाम शामिल हैं। आरोप है कि इनमें से कई का विज्ञापन के क्षेत्र में कोई बड़ा ट्रैक रिकॉर्ड नहीं है।
”क्या यह जनता की गाढ़ी कमाई का दुरुपयोग है या इसके पीछे 40% कमीशन का कोई बड़ा खेल चल रहा है?” — कुणाल शुक्ला, आरटीआई एक्टिविस्ट
जनता के पैसे पर ‘छवि चमकाने’ की कवायद?
विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा है कि यह सरकारी खजाने की खुली लूट है। जब प्रदेश की जनता को बुनियादी सुविधाओं की आवश्यकता है, तब सरकार अपनी ‘ब्रांडिंग’ के लिए उन चैनलों को करोड़ों बांट रही है जिन्हें प्रदेश में कोई देखता तक नहीं।
निष्कर्ष:
यह मामला पारदर्शी प्रशासन के दावों पर सवालिया निशान लगाता है। अब देखना यह है कि जनसंपर्क विभाग और विष्णु सरकार इन गंभीर आरोपों और विज्ञापनों के वितरण की प्रक्रिया पर क्या स्पष्टीकरण देती है।






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