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‘धड़क 2’ की निर्देशक शाज़िया इकबाल का तीखा हमला,‘धुरंधर’ को बताया नफरत फैलाने वाली फ़िल्म

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फिल्म धड़क 2 की निर्देशक शाज़िया इकबाल हाल ही में उस वक्त चर्चा में आ गईं, जब उन्होंने सोशल मीडिया पर एक चर्चित फिल्म को लेकर कड़ा रुख अपनाया। शाज़िया ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज़ के ज़रिए बिना नाम लिए फिल्म धुरंधर पर गंभीर आरोप लगाए और इसे “सिनिस्टर” यानी भीतर से नफरत फैलाने वाली फिल्म करार दिया। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज़ हो गई।

शाज़िया इकबाल ने अपने पोस्ट में लिखा कि ऐसी फिल्में तकनीकी तौर पर भले ही अच्छी लगें, उनका बैकग्राउंड म्यूज़िक प्रभावशाली हो या मेकिंग दमदार दिखे, लेकिन असली सवाल यह है कि वे समाज में किस तरह की सोच को बढ़ावा दे रही हैं। उन्होंने इशारों-इशारों में कहा कि कुछ फिल्में जानबूझकर डर, हिंसा और नफरत को सामान्य बनाती हैं, और यही बात उन्हें सबसे ज़्यादा परेशान करती है।

निर्देशक ने यह भी संकेत दिया कि फिल्म इंडस्ट्री का एक बड़ा हिस्सा ऐसी फिल्मों की आलोचना करने से बचता है, क्योंकि वे व्यावसायिक रूप से सफल होती हैं। उनके अनुसार, “अच्छी बनी फिल्म” कहकर कंटेंट के असर को नज़रअंदाज़ कर देना एक आसान रास्ता बन चुका है। शाज़िया की यह टिप्पणी सीधे तौर पर उस मानसिकता पर सवाल उठाती है, जिसमें सिनेमा को केवल मनोरंजन तक सीमित मान लिया जाता है।

इन पोस्ट्स के सामने आने के कुछ ही समय बाद शाज़िया इकबाल ने अपना इंस्टाग्राम अकाउंट प्राइवेट कर लिया, जिससे यह साफ़ हुआ कि उन्हें उनके बयान के बाद कड़ी प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ा। हालांकि उन्होंने कोई नया स्पष्टीकरण जारी नहीं किया, लेकिन अकाउंट प्राइवेट करने का फैसला यह बताने के लिए काफ़ी था कि मामला सिर्फ़ एक राय तक सीमित नहीं रहा।

दूसरी ओर, ‘धुरंधर’ को लेकर दर्शकों और फिल्म इंडस्ट्री के एक वर्ग की राय इससे अलग रही है। कई लोगों ने फिल्म को एक फिक्शनल थ्रिलर बताते हुए कहा कि इसे किसी खास विचारधारा से जोड़कर देखना ठीक नहीं है। वहीं कुछ दर्शकों का मानना है कि सिनेमा का असर समाज पर पड़ता है, और इसी वजह से इस तरह की बहस ज़रूरी भी है।

कुल मिलाकर, शाज़िया इकबाल का यह बयान एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है कि सिनेमा की ज़िम्मेदारी कहां तक जाती है। क्या फिल्में सिर्फ़ मनोरंजन का ज़रिया हैं, या फिर उन्हें अपने नैरेटिव और सामाजिक असर को लेकर भी जवाबदेह होना चाहिए — ‘धुरंधर’ को लेकर छिड़ी यह बहस इसी बड़े सवाल के इर्द-गिर्द घूमती नज़र आ रही है।

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Author: media4samachar

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