नई दिल्ली: भारतीय मीडिया जगत की दिग्गज कंपनी ‘जी मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड’ (Zee Media Corporation Ltd) इस वक्त एक बड़े कानूनी संकट में घिरती नजर आ रही है। हॉन्गकॉन्ग की एक कंपनी ने भुगतान में देरी को लेकर ज़ी मीडिया के खिलाफ सिंगापुर में कानूनी मोर्चा खोल दिया है।
क्या है पूरा मामला?
ज़ी मीडिया ने 12 फरवरी 2026 को शेयर बाजार (Stock Market) को दी गई आधिकारिक सूचना में बताया कि हॉन्गकॉन्ग की कंपनी एशिया सैटेलाइट टेलीकम्युनिकेशंस (AsiaSat) ने उसके खिलाफ आर्बिट्रेशन (मध्यस्थता) की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह मामला Singapore International Arbitration Centre (SIAC) में दर्ज किया गया है।
13 करोड़ रुपये का विवाद
विवाद की जड़ दोनों कंपनियों के बीच हुआ ट्रांसपोंडर कैपेसिटी एग्रीमेंट (TCA) है। एशिया सैटेलाइट का दावा है कि ज़ी मीडिया पर सैटेलाइट सेवाओं के उपयोग का लगभग 15.53 लाख अमेरिकी डॉलर (भारतीय मुद्रा में करीब 13 करोड़ रुपये) बकाया है। इस राशि में मूल भुगतान के साथ-साथ ब्याज और अन्य कानूनी शुल्क भी शामिल हैं।
एशिया सैटेलाइट ने की ‘फास्ट ट्रैक’ की मांग
हॉन्गकॉन्ग की इस कंपनी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए SIAC से ‘फास्ट ट्रैक’ यानी त्वरित सुनवाई की मांग की है। हालांकि, यह समझौता अब समाप्त हो चुका है, लेकिन बकाया राशि को लेकर विवाद जस का तस बना हुआ है।
ज़ी मीडिया का पक्ष
ज़ी मीडिया को इस कानूनी नोटिस की जानकारी 9 फरवरी 2026 को मिली थी। कंपनी ने अपने बयान में कहा है:
”हम इस पूरे मामले में कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ले रहे हैं और मध्यस्थता प्रक्रिया के दौरान अपनी बात मजबूती से रखेंगे। फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस मामले का कंपनी की वित्तीय स्थिति पर कितना असर पड़ेगा।”
निवेशकों की नज़र
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस अंतरराष्ट्रीय विवाद का असर आने वाले समय में ज़ी मीडिया के शेयरों पर दिख सकता है। फिलहाल मामला सिंगापुर की आर्बिट्रेशन प्रक्रिया के अधीन है और अंतिम फैसले तक कंपनी की देनदारी पर अनिश्चितता बनी रहेगी।




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