नोएडा (गौतम बुद्ध नगर): मीडिया जगत में कर्मचारियों के शोषण और वेतन रोके जाने के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताज़ा मामला नोएडा स्थित हिंदी न्यूज़ चैनल ‘एपीएन न्यूज़’ (APN News) से सामने आया है। संस्थान के एक पूर्व कर्मचारी सुबोध आनंद गार्ग्य ने चैनल की मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) और एडिटर-इन-चीफ श्रीमती राजश्री राय के खिलाफ उप श्रम आयुक्त (Deputy Labour Commissioner) कार्यालय में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।

क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता सुबोध आनंद गार्ग्य के अनुसार, उन्होंने वर्ष 2024 से 2025 के दौरान एपीएन न्यूज़ (नोएडा, सेक्टर-68) में अपनी सेवाएँ दी थीं। आरोप है कि संस्थान छोड़ने के बाद भी उनका लगभग 6 महीने का वेतन अभी तक बकाया है।
सुबोध का कहना है कि उन्होंने अपने हक के पैसे के लिए प्रबंधन के चक्कर लगाए, लेकिन संस्थान की ओर से केवल आश्वासन और चुप्पी ही मिली। हार मानकर उन्होंने 21 फरवरी 2026 को गौतम बुद्ध नगर के श्रम विभाग में गुहार लगाई है।
प्रबंधन पर अनदेखी और संवेदनहीनता के आरोप
उप श्रम आयुक्त को सौंपे गए पत्र में सुबोध ने प्रबंधन के अड़ियल रवैये पर गहरा खेद प्रकट किया है। पत्र के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- संपर्क के बावजूद चुप्पी: सुबोध का दावा है कि उन्होंने बकाया वेतन के भुगतान हेतु एमडी राजश्री राय को कई बार ईमेल, व्हाट्सएप और फोन के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनकी ओर से कोई संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं दी गई।
- दस्तावेजी सबूत: अपनी शिकायत को पुख्ता करने के लिए पीड़ित ने विभाग को अपना नियुक्ति पत्र (Appointment Letter), बैंक स्टेटमेंट (जो कम भुगतान की पुष्टि करता है) और व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट साक्ष्य के रूप में सौंपे हैं।
- ब्याज सहित भुगतान की मांग: पीड़ित ने श्रम विभाग से अनुरोध किया है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और एपीएन न्यूज़ प्रबंधन को निर्देश दें कि उनका बकाया वेतन ब्याज सहित जल्द से जल्द जारी किया जाए।
कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू
नोएडा स्थित उप श्रम आयुक्त कार्यालय ने इस शिकायत को प्राप्त कर लिया है (प्राप्ति क्रमांक: 262)। नियमनुसार, अब विभाग द्वारा संस्थान के प्रबंधन को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया जा सकता है।
शिकायतकर्ता का पक्ष:
“यह अत्यंत दुखद है कि अपनी मेहनत की कमाई के लिए एक पत्रकार को दर-दर भटकना पड़ रहा है। बार-बार अनुरोध के बावजूद प्रबंधन ने कोई पहल नहीं की, जिससे स्पष्ट होता है कि वे भुगतान की मंशा नहीं रखते।” — सुबोध आनंद गार्ग्य
निष्कर्ष
यह मामला एक बार फिर मीडिया संस्थानों के भीतर चल रहे “हायर एंड फायर” कल्चर और वेतन भुगतान में होने वाली अनियमितताओं की ओर इशारा करता है। अब देखना यह होगा कि श्रम विभाग की दखल के बाद एपीएन न्यूज़ प्रबंधन इस पर क्या रुख अपनाता है।



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