सत्ता के अहंकार और पत्रकारिता के साहस की सीधी जंग
नई दिल्ली/उत्तराखंड: लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमले की एक डरावनी कोशिश उस समय नाकाम हो गई, जब एक बाहुबली नेता की धमकी के आगे पत्रकारिता का ‘अटल’ चेहरा सामने आया। भाजपा नेता कुंवर प्रणव सिंह ‘चैंपियन’ द्वारा एक पत्रकार को डंपर से कुचलवाने और गोली मारने की धमकी देने के बाद, ‘हिन्दी ख़बर’ के प्रधान संपादक अतुल अग्रवाल ने जो साहसिक स्टैंड लिया, उसने पूरे देश में हलचल मचा दी है।
घटना: जब ‘चैंपियन’ ने पार की मर्यादा की सीमा
यह विवाद तब शुरू हुआ जब भाजपा के पूर्व विधायक चैंपियन ने अपनी खबरों से बौखलाकर ‘हिन्दी ख़बर’ के संवाददाता को सरेआम धमकाया। नेता जी का अहंकार इस कदर सिर चढ़कर बोला कि उन्होंने पत्रकार को:
डंपर से कुचलवा देने की धमकी दी।
सरेराह गोली मार देने का अल्टीमेटम दिया।
यह हमला सिर्फ एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि उस हर आवाज़ पर था जो सत्ता से सवाल पूछने का साहस रखती है।
प्रधान संपादक अतुल अग्रवाल की ललकार: “ना डरते हैं, ना डराते हैं”
धमकी की खबर मिलते ही ‘हिन्दी ख़बर’ के प्रधान संपादक अतुल अग्रवाल अपनी टीम की ढाल बनकर खड़े हो गए। उन्होंने लाइव कैमरे पर बाहुबली नेता को सीधी चुनौती देते हुए कहा:
”अगर हिन्दी ख़बर के किसी भी साथी पर गोली चलाओगे, तो सामने सबसे पहले अतुल अग्रवाल का सीना होगा। हम पीछे हटने वाले नहीं हैं, हम डंके की चोट पर सच दिखाते हैं।”
पत्रकारिता के स्वाभिमान की जीत
इस घटना ने साफ कर दिया कि पत्रकारिता का जज्बा किसी भी बंदूक की गोली से बड़ा होता है। अतुल अग्रवाल का यह बयान आज उन सभी पत्रकारों के लिए प्रेरणा बन गया है जो धमकियों के साये में काम करते हैं।
मुख्य हाइलाइट्स:
हिन्दी ख़बर का संकल्प: “ना डरते हैं, ना डराते हैं, डंके की चोट पर ख़बर दिखाते हैं।”
प्रधान संपादक की भूमिका: एक लीडर की तरह अपनी टीम के लिए खुद को खतरे के आगे खड़ा करना।
जनता का समर्थन: सोशल मीडिया पर ‘हिन्दी ख़बर’ और अतुल अग्रवाल की निडरता को मिल रहा है भारी समर्थन।
संपादकीय टिप्पणी: सत्ता आती-जाती रहती है, लेकिन जो पत्रकारिता झुकती नहीं, वही इतिहास लिखती है।


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