न्यूज़ इंडिया चैनल में राणा यशवंत सिर्फ़ ऑफर लेटर के आधार पर ही लोगों की जॉइनिंग कराने लगे थे। प्रबंधन द्वारा लगातार मेल करने के बावजूद भी कोई आवश्यक डॉक्यूमेंट उपलब्ध नहीं कराया जाता। बिना पूरी जानकारी के 45 लोगों की भर्ती कर ली गई। जब प्रबंधन द्वारा लगातार मेल किया जाता है और कहा जाता है कि जब तक डॉक्यूमेंट और एग्रीमेंट पूरे न हों, संस्थान में मत आओ, लेकिन इसे दरकिनार कर राणा यशवंत की शह पर उनके लोगों द्वारा ऑफर लेटर के आधार पर ही काम शुरू करा दिया जाता है। ऑफर लेटर में साफ लिखा है कि जब तक आप आवश्यक दस्तावेज जमा नहीं करेंगे, तब तक जॉइनिंग लेटर जारी नहीं किया जाएगा।
संस्थान के 55 पुराने लोगों को बिना नोटिस राणा यशवंत द्वारा हटा दिया गया, जिसकी जानकारी संस्थान प्रबंधन को भी नहीं दी गई थी। चेयरमैन ने साफ कहा था कि सबको रख लो, कोई दिक्कत नहीं है। नए लोगों की नियुक्ति पर चेयरमैन ने कहा था कि जब तक सबके दस्तावेज पूरे न हों, तब तक नियुक्ति न की जाए। इसके बावजूद 45 लोगों की भर्ती कर ली गई। अगर पांच लोगों की भर्ती होती तो अलग बात थी, लेकिन 45 लोग न्यूज़रूम में इकट्ठा कर लिए गए।
इसलिए सभी से कहा गया कि या तो अपने डॉक्यूमेंट पूरे करें, अन्यथा चेयरमैन और संस्थान की सैलरी देने की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। चेयरमैन द्वारा कहा गया कि आप लोग बिना अपॉइंटमेंट लेटर के यहां काम कर रहे हैं, आपसे विनती है कि यदि आप यहां रुकते हैं तो सैलरी की जिम्मेदारी संस्थान की नहीं होगी। आपको व्यक्तिगत तौर पर राणा जी ने रखा है, इसलिए इसकी जिम्मेदारी भी उन्हीं की होगी।
उल्लेखनीय है कि चेयरमैन के बार-बार कहने के बावजूद राणा यशवंत द्वारा पूरे पुराने स्टाफ को हटा दिया गया और उनकी जगह ऐसे लोगों को रख लिया गया जो दो-तीन साल से घर पर थे। आप यूट्यूब, ट्विटर और फेसबुक पर देख सकते हैं कि राणा जी, पंडित जी और उनकी टीम के अलावा किसी की खबर नहीं डाली गई। जिसने भी राणा जी की बात नहीं मानी, उसे चुपचाप निकाल दिया गया।
इस समय कोई गरीब आदमी नौकरी कर रहा है और उसे बिना नोटिस निकाल दिया जाए तो वह दुआ देगा या बद्दुआ? यदि किसी को हटाना भी है तो क्या इस पर चर्चा नहीं होनी चाहिए? क्या कोई एक व्यक्ति ही मालिक है? लगातार गलत को सही साबित करने की कोशिश की जाती रही।
(न्यूज़ इंडिया के एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित)


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