लखनऊ/दिल्ली: किसी भी मीडिया संस्थान की नींव उसके विज़न और आर्थिक अनुशासन पर टिकी होती है। न्यूज़ इंडिया (News India) के संदर्भ में यह साफ़ हो गया है कि यदि चेयरमैन शैलेंद्र शर्मा उर्फ शालू पंडित ने समय रहते मोर्चा नहीं संभाला होता, तो पूर्व संपादक राणा यशवंत की ‘काल्पनिक योजनाओं’ ने संस्थान को गहरे गर्त में धकेल दिया होता।
चेयरमैन का विज़न: संस्थान और कर्मचारियों का हित सर्वोपरि
शैलेंद्र शर्मा एक ‘फ्रंट फुट’ खिलाड़ी के रूप में उभरे हैं, जिन्होंने अपनी पारखी नज़र से उस आर्थिक खतरे को पहचान लिया जो संस्थान की स्थिरता को चुनौती दे रहा था।
संस्थान को बचाया: चेयरमैन ने करोड़ों रुपये की अंधी बर्बादी को रोककर न्यूज़ इंडिया के भविष्य को सुरक्षित किया है।
ठोस निर्णय: एक उद्यमी के तौर पर उन्होंने दिखाया कि संस्थान ‘क्रांतिकारी जुमलों’ से नहीं, बल्कि जवाबदेही और पारदर्शी मैनेजमेंट से चलता है।
राणा यशवंत का ‘घातक’ प्रबंधन: संस्थान पर लादा बेहिसाब बोझ
रिपोर्ट्स के अनुसार, राणा यशवंत ने चेयरमैन के भरोसे का अनुचित लाभ उठाते हुए संस्थान को आर्थिक बोझ तले दबा दिया:
हवाई नियुक्तियाँ: बिना किसी वित्तीय योजना के लंदन, पेरिस और न्यूयॉर्क में नियुक्तियों का ढोल पीटा गया, जबकि चैनल के बुनियादी राजस्व पर कोई काम नहीं हुआ।
विवादास्पद सलाहकार: एक ऐसे व्यक्ति को कंसलटेंट बनाया गया जिस पर धोखाधड़ी के गंभीर आरोप हैं, जिससे संस्थान की छवि को नुकसान पहुँच सकता था।
सिर्फ कागजी ‘क्रांति’: ‘अर्धसत्य’ जैसे शो के नाम पर बौद्धिक विमर्श तो किया गया, लेकिन चैनल को अपने पैरों पर खड़ा करने की कोई ठोस कोशिश नहीं की गई।
विदाई के बाद ‘बेआबरू’ हरकतें: चेयरमैन की सख्त चेतावनी
संस्थान से विदा होने के बाद राणा यशवंत द्वारा फैलाई जा रही भ्रामक अफवाहों पर चेयरमैन शैलेंद्र शर्मा ने कड़ा रुख अपनाया है।
”अगर अफवाहों का दौर बंद नहीं हुआ, तो राणा यशवंत के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। सच्चाई यह है कि उन्हें अपनी विफलता स्वीकार करनी चाहिए, न कि संस्थान की छवि धूमिल करनी चाहिए।” — शैलेंद्र शर्मा (चेयरमैन, न्यूज़ इंडिया)





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