
नोएडा/लखनऊ: देश के प्रतिष्ठित डिजिटल न्यूज पोर्टल ‘मीडिया4समाचार’ (Media4Samachar) की एक खोजी रिपोर्ट ने ‘न्यूज इंडिया’ चैनल के गलियारों में वो सुनामी ला दी है, जिससे बड़े-बड़े सूरमाओं के चेहरे बेनकाब हो गए हैं। मीडिया4समाचार पर खबर प्रकाशित होने के बाद, संस्थान के भीतर चल रहे ‘नियुक्ति घोटाले’ की परतें दर परत खुलने लगी हैं। ताजा घटनाक्रम में, वरिष्ठ पत्रकार राणा यशवंत की सरपरस्ती में चैनल का हिस्सा बने कई पत्रकारों ने पूरी तरह से घुटने टेक दिए हैं और अपनी जालसाजी स्वीकार कर ली है।
खबर का जबरदस्त असर: ईमेल के जरिए कबूला अपना ‘पाप’
मीडिया4समाचार की रिपोर्टिंग का दबाव ऐसा रहा कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हथियाने वाले पत्रकारों के पास अब छिपने का कोई रास्ता नहीं बचा है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, इन पत्रकारों ने संस्थान के चेयरमैन शैलेंद्र शर्मा को आधिकारिक ईमेल भेजकर अपनी गलती स्वीकार की है।
ईमेल में पत्रकारों का लिखित कबूलनामा:
“मैने संस्थान को गलत पेपर (दस्तावेज) दिए हैं, जिसके लिए मैं (चेयरमैन) आपसे बिना शर्त माफी मांगता हूँ।”
यह केवल एक माफीनामा नहीं है, बल्कि उस गिरोहबंदी की हार है जो पत्रकारिता की आड़ में धोखाधड़ी का साम्राज्य चला रहे थे।
कटघरे में ‘राणा यशवंत’: क्या यह एक संगठित ‘भर्ती घोटाला’ है?
इस पूरे प्रकरण ने सीधे तौर पर राणा यशवंत की साख और उनकी कार्यप्रणाली पर ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब देना उनके लिए नामुमकिन लग रहा है। मीडिया गलियारों में अब ये तीखे सवाल गूंज रहे हैं:
सत्यापन में जानबूझकर लापरवाही:
क्या राणा यशवंत ने अपने पसंदीदा और खास लोगों को ऊंचे पदों पर बैठाने के लिए जानबूझकर दस्तावेजों की जांच (Background Verification) को दरकिनार किया?
चेयरमैन को धोखे में रखना: क्या इतने बड़े संस्थान के चेयरमैन शैलेंद्र शर्मा को अंधेरे में रखकर यह पूरा ‘फर्जीवाड़ा’ राणा यशवंत के नेतृत्व में अंजाम दिया गया?
*नैतिकता का ढोंग:* खुद को पत्रकारिता का ‘आदर्श’ और ‘भीष्म पितामह’ बताने वाले राणा यशवंत के लिए यह ईमेल किसी चार्जशीट से कम नहीं है। उनकी नाक के नीचे उनके द्वारा चुने गए लोग जालसाजी के दोषी पाए जा रहे हैं।
राणा यशवंत की साख पर लगा ‘कभी न मिटने वाला धब्बा’
राणा यशवंत अक्सर मीडिया की शुचिता और ईमानदारी पर भारी-भरकम भाषण देते नजर आते हैं, लेकिन मीडिया4समाचार की रिपोर्ट ने उनकी इस छवि के पीछे की सच्चाई को उजागर कर दिया है। उनके द्वारा तैयार की गई टीम का इस तरह चेयरमैन के सामने घुटने टेकना और ईमेल भेजकर अपनी जालसाजी स्वीकार करना, राणा यशवंत की पेशेवर विफलता और नैतिक पतन का सबसे बड़ा प्रमाण है।
मीडिया4समाचार की ‘सत्यता’ पर मुहर
यह घटनाक्रम साबित करता है कि मीडिया4समाचार ने जिस भ्रष्टाचार और अनैतिकता की ओर इशारा किया था, वह 100% सटीक था। हमारी खबर का ही असर था कि इन पत्रकारों को पर्दे के पीछे से निकलकर अपनी गलती माननी पड़ी।
चेयरमैन शैलेंद्र शर्मा अब इन ईमेलों को आधार बनाकर उन लोगों पर भी सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं, जिन्होंने इन ‘फर्जी पत्रकारों’ की सिफारिश की थी और उन्हें संस्थान के भीतर एंट्री दिलाई थी। क्या अब राणा यशवंत इस नैतिक हार की जिम्मेदारी लेते हुए कोई ठोस कदम उठाएंगे या फिर हमेशा की तरह मौन रहकर अपना बचाव करेंगे ?
संपादकीय नोट: मीडिया4समाचार केवल खबरें नहीं दिखाता, बल्कि सिस्टम में बैठे भ्रष्ट चेहरों को बेनकाब करने का साहस रखता है। पत्रकारिता की मर्यादा के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ हमारी जंग जारी रहेगी।





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