
नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट पत्रकार व चर्चित संपादक राणा यशवंत और न्यूज़ इंडिया 24/7 के मैनेजमेंट के बीच का टकराव अब एक नए और निचले स्तर पर पहुँच गया है। सोशल मीडिया पर राणा यशवंत द्वारा दी जा रही “फाइलें खोलने” की धमकियों को मीडिया जगत का एक बड़ा हिस्सा अब पत्रकारिता नहीं, बल्कि ‘खुलेआम ब्लैकमेलिंग’ के तौर पर देख रहा है।
दबाव बनाने का नया हथकंडा ?
सूत्रों का दावा है कि जब संस्थान के भीतर प्रशासनिक सुधार और नियुक्तियों के वेरिफिकेशन की प्रक्रिया शुरू हुई, तो राणा यशवंत ने इसे अपने ‘ईगो’ पर ले लिया। अब सोशल मीडिया पर “संगीन अपराधों की फाइलें” होने का दावा करना और “बाहर कैसे हो भाई?” जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना यह दर्शाता है कि वह तथ्यों के आधार पर नहीं, बल्कि मानसिक दबाव और ब्लैकमेलिंग के जरिए मैनेजमेंट को झुकाना चाहते हैं।
कानूनी शिकंजे की तैयारी: मानहानि और आईटी एक्ट के तहत हो सकती है कार्रवाई
मीडिया गलियारों में चर्चा है कि राणा यशवंत की इन विवादास्पद पोस्टों का संज्ञान लेते हुए न्यूज़ इंडिया 24/7 का मैनेजमेंट अब कानूनी कार्रवाई की तैयारी में है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि बिना किसी अदालती आदेश या ठोस सबूत के किसी व्यक्ति को “अपराधी” कहना और उसकी “फाइलें खोलने” की धमकी देना सीधे तौर पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट के तहत ‘आपराधिक मानहानि’ और ‘जबरन वसूली’ (Extortion) के दायरे में आता है। संस्थान इस डिजिटल ब्लैकमेलिंग के खिलाफ साइबर सेल में भी शिकायत दर्ज करा सकता है।
ब्लैकमेलिंग के आरोपों को बल देते मुख्य बिंदु:
- समय पर सवाल: अगर मैनेजमेंट के पास वाकई “संगीन अपराधों” का रिकॉर्ड था, तो राणा यशवंत इतने समय तक उसी संस्थान में मलाईदार पद पर क्यों बने रहे?
- सोशल मीडिया का दुरुपयोग: एक संपादक का काम खबरें दिखाना होता है, लेकिन यहाँ फेसबुक लाइव का उपयोग एक ‘धमकी भरे प्लेटफॉर्म’ के रूप में किया जा रहा है।
- बिना सबूत के चरित्र हनन: सार्वजनिक मंच पर किसी को ‘अपराधी’ घोषित करना ब्लैकमेलिंग की श्रेणी में आता है, ताकि सामने वाला पक्ष डरकर समझौता कर ले।
मीडिया जगत में गिरती साख
राणा यशवंत के इस व्यवहार से उनके पुराने साथी भी हैरान हैं। चर्चा है कि एक अनुभवी पत्रकार का इस तरह ‘ब्लैकमेलर’ जैसी भाषा शैली अपनाना पूरी बिरादरी को शर्मसार कर रहा है। क्या आज सुबह 11 बजे का लाइव सत्र वास्तव में कोई तथ्य सामने लाएगा, या यह मैनेजमेंट को डराने-धमकाने का एक और असफल प्रयास साबित होगा?
निष्कर्ष: पत्रकारिता में तथ्यों का महत्व होता है, लेकिन राणा यशवंत का वर्तमान रुख ‘तथ्यों’ से ज्यादा ‘धमकियों’ पर टिका नजर आता है। कानूनी जानकारों के मुताबिक, इस तरह की डिजिटल ब्लैकमेलिंग भविष्य में उनके लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है।



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