नई दिल्ली | डिजिटल डेस्क भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने मीडिया जगत में एक बड़ा रणनीतिक बदलाव करते हुए ‘टीवी रेटिंग पॉलिसी 2026’ की घोषणा की है। इस नई नीति के तहत टीवी रेटिंग एजेंसियों, विशेषकर BARC (ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल) जैसी संस्थाओं पर सरकारी नियंत्रण और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रावधानों को अत्यधिक सख्त कर दिया गया है।
अब टीवी ऑडियंस डेटा को केवल एक व्यापारिक आंकड़े के रूप में नहीं, बल्कि देश की ‘डेटा संप्रभुता’ (Data Sovereignty) और सुरक्षा के लिहाज से एक महत्वपूर्ण संसाधन माना जाएगा।
राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर कड़े प्रावधान
नई पॉलिसी के मुताबिक, सरकार को यह अधिकार होगा कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा के हितों को देखते हुए किसी भी रेटिंग एजेंसी के कामकाज पर रोक लगा सके। यदि सरकार को लगता है कि डेटा का उपयोग देश की सुरक्षा के खिलाफ हो सकता है, तो वह एजेंसी के पूरे नेटवर्क और सेवाओं को अपने सीधे नियंत्रण में ले सकती है।
आपातकाल और युद्ध की स्थिति में तत्काल कार्रवाई
गाइडलाइंस में स्पष्ट किया गया है कि:
- बिना पूर्व नोटिस की कार्रवाई: राष्ट्रीय सुरक्षा, आपातकाल या युद्ध जैसी स्थितियों में सरकार बिना किसी पूर्व सूचना के रेटिंग ऑपरेशंस को रोक, सस्पेंड या पूरी तरह खत्म कर सकती है।
- अनिवार्य अनुपालन: ऐसी स्थिति में एजेंसियों को सरकार के निर्देशों का तत्काल पालन करना होगा। आदेश न मानने पर रजिस्ट्रेशन रद्द करने के साथ-साथ 5 साल का बैन भी लगाया जा सकता है।
डेटा सुरक्षा: ‘देश का डेटा, देश के भीतर’
सरकार ने डेटा के अंतरराष्ट्रीय हस्तांतरण पर डिजिटल स्ट्राइक की है। नई नीति के तहत:
- कोई भी रेटिंग एजेंसी भारतीय दर्शकों का डेटा भारत की भौगोलिक सीमा से बाहर ट्रांसफर नहीं कर सकेगी, जब तक कि कानून विशेष अनुमति न दे।
- इसका मुख्य उद्देश्य विदेशी ताकतों को भारतीय जनमानस के रुझान और व्यवहार (Consumer Behavior) का विश्लेषण करने से रोकना है।
एजेंसियों के लिए बढ़ा ‘ऑपरेशनल रिस्क’
इस पॉलिसी ने रेटिंग कंपनियों के लिए आर्थिक और परिचालन जोखिम (Financial & Operational Risk) को काफी बढ़ा दिया है।
- मुआवजे का कोई प्रावधान नहीं: यदि सरकार किसी एजेंसी का काम अपने हाथ में लेती है या उसे सस्पेंड करती है, तो कंपनी को किसी भी प्रकार का हर्जाना या लाइसेंस विस्तार का लाभ नहीं मिलेगा। सारा आर्थिक नुकसान कंपनी को ही वहन करना होगा।
- सिक्योरिटी क्लियरेंस अनिवार्य: एजेंसी के साथ-साथ उसके ‘की-पर्सनेल’ (Key Personnel) यानी मुख्य अधिकारियों के लिए सिक्योरिटी क्लियरेंस बनाए रखना अनिवार्य होगा। यदि किसी अधिकारी का क्लियरेंस रद्द होता है, तो उसे तुरंत पद से हटाना होगा, अन्यथा एजेंसी का लाइसेंस रद्द हो सकता है।
‘क्रिटिकल इंफॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर’ का दर्जा
विशेषज्ञों का मानना है कि इन नियमों के जरिए सरकार ने टीवी रेटिंग सिस्टम को “क्रिटिकल इंफॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर” की श्रेणी में खड़ा कर दिया है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब डिजिटल डेटा और क्रॉस-प्लेटफॉर्म एनालिटिक्स तेजी से बदल रहे हैं। अब इंडस्ट्री के लिए संदेश साफ है—सिर्फ पारदर्शिता ही काफी नहीं है, बल्कि ‘राष्ट्र प्रथम’ और डेटा सुरक्षा उनके कामकाज का अनिवार्य हिस्सा होंगे।
संपादकीय टिप्पणी: यह नीति भविष्य के ‘इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर’ (सूचना युद्ध) को ध्यान में रखकर तैयार की गई लगती है, जहाँ डेटा ही सबसे बड़ा हथियार है।






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