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‘आज तक’ न्यूज चैनल पर प्रसारित विज्ञापन के जरिए करोड़ों की ठगी,प्रतिष्ठित चैनल की विश्वसनीयता पर उठे सवाल

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नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट

​डिजिटल इंडिया के दौर में जहाँ एक ओर ऑनलाइन शॉपिंग सुगम हुई है, वहीं दूसरी ओर विज्ञापन की आड़ में ठगी का एक नया जाल बुना जा रहा है। ताज़ा मामला देश के सबसे बड़े न्यूज़ चैनलों में से एक ‘आज तक’ (Aaj Tak) से जुड़ा है, जहाँ प्रसारित एक हेडफोन विज्ञापन ने कई उपभोक्ताओं को अपना शिकार बनाया है।

क्या है पूरा मामला?

​शिकायतकर्ता पंकज कुमार के अनुसार, पिछले कुछ महीनों से ‘आज तक’ चैनल पर एक प्रीमियम हेडफोन (Bose) का विज्ञापन बार-बार दिखाया जा रहा था। विज्ञापन में महंगे हेडफोन को बहुत ही आकर्षक और कम कीमत पर देने का दावा किया गया था। चैनल की साख को देखते हुए पंकज कुमार ने विज्ञापन पर भरोसा किया और 6 जनवरी 2026 को ₹5,100 का भुगतान कर ऑर्डर प्लेस किया।

ठगी का जाल: आश्वासन से खामोशी तक

​ऑर्डर के बाद कंपनी की ओर से टालमटोल का सिलसिला शुरू हुआ:

  • 12 जनवरी: ऑर्डर न मिलने पर homestore18india.in पर शिकायत की गई।
  • 15 – 23 जनवरी: कंपनी ने ‘तकनीकी खामी’ और ‘लॉजिस्टिक समस्या’ का हवाला देकर समय माँगा। ईमेल के जरिए भरोसा दिलाया गया कि पैसा सुरक्षित है।
  • 5 फरवरी: जब पंकज ने ऑर्डर कैंसिल करने की मांग की, तो कंपनी ने रिफंड से साफ इनकार कर दिया और एक-दो दिन में डिलीवरी का झूठा वादा किया।

चैनल की भूमिका पर गंभीर सवाल

​पंकज कुमार का आरोप है कि जब उन्होंने ‘आज तक’ प्रबंधन को इस फर्जीवाड़े की जानकारी दी, तब जाकर विज्ञापन बंद किया गया। लेकिन तब तक सैकड़ों लोग इस झांसे में आकर अपनी गाढ़ी कमाई गंवा चुके थे।

बड़े सवाल जो जवाब मांगते हैं:

  1. ​क्या ‘आज तक’ जैसे बड़े चैनल विज्ञापनों को प्रसारित करने से पहले उनके कानूनी दस्तावेजों और साख की जांच (KYC) नहीं करते?
  2. ​फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शिकायतों के अंबार के बावजूद एक सप्ताह तक विज्ञापन क्यों चलता रहा?
  3. ​क्या चैनल केवल रेवेन्यू (राजस्व) के लिए अपने दर्शकों के भरोसे का सौदा कर रहा है?

मौजूदा स्थिति

​फिलहाल उक्त विज्ञापन बंद है, लेकिन विज्ञापनदाता कंपनी की वेबसाइट अब भी सक्रिय है और उसका गुड़गांव का पता भी दर्ज है। पंकज कुमार ने इस मामले में रिफंड न मिलने और मानसिक प्रताड़ना की बात कही है।

​”यह केवल ₹5,100 का मामला नहीं है, बल्कि उस भरोसे का है जो आम आदमी एक प्रतिष्ठित न्यूज़ चैनल पर करता है। अगर विज्ञापन दिखाने वाला माध्यम ही जिम्मेदारी नहीं लेगा, तो उपभोक्ता कहाँ जाएगा?” — पंकज कुमार, पीड़ित

 

विशेषज्ञों की राय

​कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि Consumer Protection Act, 2019 के तहत भ्रामक विज्ञापन दिखाने वाले प्लेटफॉर्म की भी जवाबदेही तय की जा सकती है। यदि चैनल ने लापरवाही बरती है, तो वे भी हर्जाने के दायरे में आ सकते हैं।

संपर्क सूत्र: यदि आप भी इस विज्ञापन के जरिए ठगी का शिकार हुए हैं, तो आप पंकज कुमार से pankaj1221@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं ताकि इस मुहिम को सामूहिक रूप से आगे बढ़ाया जा सके।

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Author: media4samachar

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