Home » टीवी » कोर्ट के खौफ से ‘क्लीन अप’ मोड में आए न्यूज इंडिया चैनल के चेयरमैन,’मीडिया4समाचार’ का दोटूक जवाब—”दबेंगे नहीं,खबर हटेगी नहीं”

कोर्ट के खौफ से ‘क्लीन अप’ मोड में आए न्यूज इंडिया चैनल के चेयरमैन,’मीडिया4समाचार’ का दोटूक जवाब—”दबेंगे नहीं,खबर हटेगी नहीं”

98 Views

नोएडा: न्यूज़ इंडिया 24×7 चैनल के चेयरमैन शैलेन्द्र शर्मा (शालू पंडित) और वरिष्ठ पत्रकार राणा यशवंत के बीच का विवाद अब ‘डिजिटल वॉर’ में तब्दील हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, कोर्ट के संभावित डंडे और कानूनी कार्रवाई से घबराए चेयरमैन अब अपनी छवि चमकाने के लिए डिजिटल साक्ष्यों को मिटाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी कड़ी में विभिन्न न्यूज़ पोर्टल्स पर खबर हटाने का भारी दबाव बनाया जा रहा है, लेकिन प्रमुख न्यूज़ वेबसाइट ‘मीडिया4समाचार’ ने इस दबाव के आगे झुकने से साफ इनकार कर दिया है।

कानूनी शिकंजे ने बढ़ाई धड़कनें

​जानकारों का कहना है कि शैलेन्द्र शर्मा का राणा यशवंत से हाथ जोड़कर माफी मांगना कोई ‘हृदय परिवर्तन’ नहीं, बल्कि एक सोची-समझी लीगल स्ट्रेटजी है। कोर्ट में मामला फंसता देख चेयरमैन को सलाह दी गई कि सार्वजनिक माफी ही उन्हें कानूनी कार्यवाही या भारी जुर्माने से बचा सकती है। अब इस कानूनी डर का अगला चरण है— इंटरनेट से विवादित खबरों को गायब करना।

खबर है कि न्यूज़ इंडिया चैनल की लीगल टीम लगातार ‘मीडिया4समाचार’ जैसे निर्भीक पोर्टल्स पर दबाव बना रहे हैं कि चेयरमैन की बदनामी वाली खबरों को हटा लिया जाए। लेकिन ‘मीडिया4समाचार’ ने प्रबंधन को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि:

  • सच्चाई के साथ कोई समझौता नहीं होगा।
  • दबाव की राजनीति पत्रकारिता के आड़े नहीं आएगी।
  • जो घटना सार्वजनिक है और जिसका साक्ष्य खुद चेयरमैन का माफीनामा है, उसे इतिहास से मिटाया नहीं जा सकता।

खबर हटवाने के पीछे की घबराहट

​आखिर शैलेन्द्र शर्मा खबरें हटवाने के लिए इतने बेताब क्यों हैं? इसके पीछे के प्रमुख कारण:

  1. न्यायालय में साक्ष्य: डिजिटल खबरें कोर्ट में चेयरमैन के खिलाफ पुख्ता सबूत बन सकती हैं।
  2. गूगल सर्च क्लीनिंग: चेयरमैन चाहते हैं कि जब भी कोई यह मामला या घटना सर्च करे, तो यह ‘काला अध्याय’ सामने न आए।
  3. कॉर्पोरेट इमेज: विज्ञापनदाताओं के बीच साख बचाने के लिए वे इस विवाद को पूरी तरह ‘दफन’ करना चाहते हैं।

तानाशाही बनाम पत्रकारिता

​एक मीडिया संस्थान के मालिक द्वारा दूसरे मीडिया संस्थानों (वेबसाइटों) को खबर हटाने के लिए मजबूर करना या डराना, अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला माना जा रहा है। ‘मीडिया4समाचार’ के इस रुख ने यह साबित कर दिया है कि रसूख और पैसे के दम पर हर कलम को खरीदा या डराया नहीं जा सकता।

निष्कर्ष

​शालू पंडित की माफी ने जहां उनकी गलती पर मुहर लगाई है,वहीं खबरों को हटवाने की उनकी कोशिश ने उनके डर को सार्वजनिक कर दिया है। अब देखना यह है कि कानून का डंडा और ‘मीडिया4समाचार’ जैसी निर्भीक वेबसाइटों की निष्पक्षता चेयरमैन के इस ‘इमेज वाशिंग’ अभियान को कितना सफल होने देती है।

media4samachar
Author: media4samachar

Live Cricket

Daily Astrology