नोएडा: मीडिया जगत के गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। जनतंत्र TV की एंकर मीनाक्षी सिसोदिया ने संस्थान के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अब इस लड़ाई को अदालत तक ले जाने का फैसला किया है। पिछले कुछ दिनों से संस्थान के भीतर चल रहे कथित तनाव और कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार के आरोपों के बाद, मीनाक्षी ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए अब कानूनी रास्ता अख्तियार करेंगी।
“अंतिम सांस तक लड़ेगी यह क्षत्राणी”
मीनाक्षी सिसोदिया ने सोशल मीडिया पर एक भावुक और आक्रोश से भरी पोस्ट साझा की है, जिसमें उन्होंने प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने बताया कि दो दिन पहले संस्थान को भेजा गया उनका ईमेल अनसुना कर दिया गया। मीनाक्षी ने लिखा, “शायद इन्हें फर्क नहीं पड़ता क्योंकि इनकी प्रशासन में पकड़ अच्छी होगी, लेकिन ये भूल रहे हैं कि जिस स्त्री ने स्वाभिमान से समझौता न करने की ठान ली हो, उसे हराना नामुमकिन है।”
संस्थान के ‘दोहरे चरित्र’ पर प्रहार
अपनी पोस्ट में मीनाक्षी ने संस्थान द्वारा नोएडा ‘वेज प्रोटेस्ट’ (Wage Protest) पर की जा रही डिबेट्स पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि जो चैनल दूसरों के हक की बात टीवी पर करता है, उसे पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। उन्होंने उन पूर्व कर्मचारियों की एक लंबी सूची भी सार्वजनिक की है, जिनके साथ कथित तौर पर गलत व्यवहार हुआ है, जिनमें कमल मिश्रा, शिवानी ठाकुर, शिल्पा तोमर, जूही, कीर्तिमान और विवेक जैसे नाम शामिल हैं।
खबर के मुख्य बिंदु:
कानूनी कार्रवाई की तैयारी: मीनाक्षी सिसोदिया अब जल्द ही कोर्ट में केस फाइल करने जा रही हैं, जिससे संस्थान की कानूनी पेचीदगियां बढ़ सकती हैं।
स्वाभिमान सर्वोपरि: एंकर ने साफ किया है कि उन्हें नौकरी जाने या इंडस्ट्री से बाहर किए जाने का कोई डर नहीं है। उन्होंने कहा कि वे बैलगाड़ी से लेकर बुलेट तक चलाना जानती हैं और जरूरत पड़ी तो चूल्हे पर खाना बनाकर रह लेंगी, लेकिन अधर्म के खिलाफ झुकेंगी नहीं।
सामूहिक आवाज: यह लड़ाई अब केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उन सभी कर्मचारियों की आवाज बनती दिख रही है जिन्होंने इस संस्थान में प्रताड़ना झेली है।
मीडिया जगत में हड़कंप
इस पूरे घटनाक्रम ने नोएडा के मीडिया जगत में हलचल मचा दी है। आमतौर पर मीडियाकर्मी आंतरिक विवादों को दबा देते हैं, लेकिन मीनाक्षी का यह निडर रुख अन्य पीड़ित कर्मचारियों के लिए एक मिसाल बन सकता है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए एक कहावत का भी उल्लेख किया कि नारी और ब्राह्मण को सताने वालों का वंश और वैभव सब मिट जाता है।
मीडिया4समाचार लगातार इस मामले पर नजर बनाए हुए है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कोर्ट में केस फाइल होने के बाद जनतंत्र TV का प्रबंधन क्या सफाई देता है और आने वाले दिनों में यह विवाद क्या मोड़ लेता है।
Dear Management Team,
This is with reference to the ongoing proceedings before the Labour Authority.
Sent as a final reminder in continuation of my earlier communications.
On 25 February 2026, I was removed from the official work group, after which my services were practically discontinued. As per applicable labour laws, the Full & Final settlement is required to be processed within the prescribed time period after separation from service. However, till date, neither my Full & Final settlement has been cleared nor any formal communication has been provided to me.
Further, on 09 March 2026, when I visited the office as directed by the management, I was subjected to humiliating treatment and was compelled to leave the office premises, due to which I had to seek police assistance.
The matter is already under consideration before the Hon’ble Labour Commissioner, and as per the directions of the Labour Commissioner, settlement of my pending dues was expected

Regards
Minakshee Sisodia



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