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एंकर मीनाक्षी सिसौदिया पहुंचीं जनतंत्र टीवी न्यूज चैनल के खिलाफ श्रम विभाग,सहायक श्रमायुक्त कर सकते हैं जवाब तलब

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नोएडा | मीडिया जगत में पत्रकारों के हक और उनके बकाया भुगतान (Full & Final Settlement) को लेकर होने वाले विवाद अब सड़कों से निकलकर सरकारी दफ्तरों की चौखट तक पहुँचने लगे हैं। ताजा मामला नोएडा स्थित न्यूज़ चैनल ‘जनतंत्र टीवी’ न्यूज चैनल से सामने आया है। चैनल में कार्यरत रही एंकर मीनाक्षी सिसौदिया ने संस्थान पर शोषण और बकाया राशि न देने का आरोप लगाते हुए श्रम विभाग में शिकायत दर्ज कराई है।

सहायक श्रमायुक्त (ALC) ने शुरू करेंगे जांच

​प्राप्त आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, मीनाक्षी सिसौदिया ने थक-हारकर सहायक श्रमायुक्त (ALC), नोएडा के पास अपनी गुहार लगाई है। इस शिकायत के तहत ऑनलाइन दर्ज किया गया है। जिसका सीधा मतलब है कि श्रम विभाग ने मामले का संज्ञान ले लिया है और अब प्रबंधन से जवाब-तलब करने की प्रक्रिया शुरू किसी भी समय शुरू कर सकता हैं

क्या है पूरा विवाद

​सूत्रों और उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यह विवाद संस्थान छोड़ने के बाद होने वाले ‘फुल एंड फाइनल’ (F&F) भुगतान से जुड़ा है। आरोप है कि एंकर मीनाक्षी सिसौदिया, जो लंबे समय तक चैनल का प्रमुख चेहरा रहीं, उनके जाने के बाद संस्थान ने उनका वाजिब बकाया नहीं चुकाया। बार-बार के अनुरोध के बावजूद प्रबंधन ने इस पर कोई संतोषजनक कदम नहीं उठाया, जिसके बाद उन्हें कानूनी रास्ता अख्तियार करना पड़ा।

खबर के प्रमुख बिंदु:

​बकाया भुगतान में देरी: इस्तीफा देने के बाद महीनों बीत जाने पर भी अंतिम हिसाब नहीं किया गया।
​प्रशासनिक लापरवाही: न्यूज़ रूम में चर्चा है कि प्रबंधन कर्मचारियों के हितों के प्रति उदासीन रवैया अपना रहा हैं
छवि पर संकट: एक महिला एंकर द्वारा उठाए गए इस कदम से नोएडा मीडिया हब में हलचल मच गई है।
​संस्थान की कार्यसंस्कृति पर उठते सवाल

​यह मामला न केवल ‘जनतंत्र टीवी’ बल्कि पूरे मीडिया उद्योग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जानकारों का कहना है कि जो न्यूज़ चैनल दिन-भर स्क्रीन पर ‘शोषितों की आवाज़’ बनने का दावा करते हैं, वे अपने ही कर्मचारियों के साथ न्याय करने में विफल साबित हो रहे हैं।

​कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि श्रम विभाग की जांच में दोष सिद्ध होता है, तो चैनल प्रबंधन पर भारी जुर्माना और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी

​बड़ा सवाल: क्या दूसरों को इंसाफ का पाठ पढ़ाने वाला प्रबंधन खुद अपने पत्रकारों के हक पर कुंडली मारकर बैठा है? अब देखना यह होगा कि श्रम विभाग के नोटिस के बाद क्या प्रबंधन अपनी गलती सुधारता है या यह मामला कोर्ट की लंबी चौखट तक खिंचेगा।

Discliamer: पीड़ित महिला एंकर द्वारा Media4samachar को भेजे गए पत्र के अनुसार

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Author: media4samachar

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