
नई दिल्ली | भारत सरकार ने देश के सार्वजनिक प्रसारक प्रसार भारती को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक और रचनात्मक कदम उठाया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने देश के प्रतिष्ठित विज्ञापन गुरु, गीतकार और लेखक प्रसून जोशी को प्रसार भारती का नया चेयरमैन नियुक्त किया है।
प्रसार भारती, जिसके दायरे में दूरदर्शन और आकाशवाणी जैसे विशाल नेटवर्क आते हैं, अब जोशी के दशकों पुराने अनुभव और रचनात्मक विजन के साथ एक नए सफर की शुरुआत करने के लिए तैयार है।
बहुआयामी व्यक्तित्व: विज्ञापन से सिनेमा तक का सफर
प्रसून जोशी भारतीय संचार जगत का वो नाम हैं जिन्होंने भाषा और भावनाओं के मेल से ‘आम आदमी’ के दिल में जगह बनाई है।
- साहित्य और सिनेमा: ‘तारे ज़मीन पर’, ‘भाग मिल्खा भाग’ और ‘रंग दे बसंती’ जैसी फिल्मों के माध्यम से उन्होंने समाज को प्रेरित किया।
- एडवरटाइजिंग: McCann World Group के CEO (भारत) और एशिया पैसिफिक के चेयरमैन के रूप में उन्होंने भारतीय विज्ञापन को वैश्विक पहचान दिलाई।
- पब्लिक कम्युनिकेशन: उनकी लेखनी सीधे जनता से जुड़ती है, जो सार्वजनिक सेवा प्रसारक (Public Service Broadcaster) के लिए सबसे अनिवार्य योग्यता है।
सरकार का विजन: नई ऊर्जा और आधुनिक सोच
इस नियुक्ति पर केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने विश्वास जताया कि प्रसून जोशी का नेतृत्व प्रसार भारती को बदलते मीडिया परिदृश्य के अनुकूल बनाएगा। उन्होंने कहा:
”प्रसून जोशी एक ऐसे सृजनात्मक व्यक्तित्व हैं जिनकी पहचान विज्ञापन, साहित्य और सिनेमा की दुनिया में वैश्विक है। उनके मार्गदर्शन में प्रसार भारती को एक नई ऊर्जा, नया विजन और एक अलग रचनात्मक दिशा मिलेगी।”
अनुभव की विरासत
जोशी के पास सरकारी और कॉर्पोरेट दोनों क्षेत्रों में काम करने का व्यापक अनुभव है:
- CBFC नेतृत्व: अगस्त 2017 से ‘सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन’ के चेयरमैन रहते हुए उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री और सर्टिफिकेशन के बीच संतुलन बनाने का कार्य किया।
- सांस्कृतिक जुड़ाव: 2016 से वे ‘इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र’ (IGNCA) के ट्रस्टी के रूप में भारतीय संस्कृति के संरक्षण में जुटे हैं।
भविष्य की चुनौतियां और अवसर
विशेषज्ञों का मानना है कि यह नियुक्ति तब हुई है जब डिजिटल मीडिया और OTT प्लेटफॉर्म पारंपरिक टीवी और रेडियो को चुनौती दे रहे हैं। प्रसून जोशी के सामने कुछ मुख्य लक्ष्य होंगे:
- डिजिटल कायाकल्प: दूरदर्शन और आकाशवाणी को मोबाइल-फर्स्ट कंटेंट के दौर में प्रासंगिक बनाना।
- युवा दर्शकों से जुड़ाव: कंटेंट में नवीनता लाकर नई पीढ़ी को सरकारी चैनल से जोड़ना।
- ग्लोबल ब्रैंडिंग: बीबीसी (BBC) की तर्ज पर प्रसार भारती को एक वैश्विक विश्वसनीय ब्रांड के रूप में स्थापित करना।
निष्कर्ष:
प्रसून जोशी की नियुक्ति केवल एक पद भरने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संकेत है कि सरकार अब प्रसार भारती को अधिक ‘क्रिएटिव’ और ‘कनेक्टेड’ बनाना चाहती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि उनकी कलम और विजन दूरदर्शन के पुराने गौरव को आधुनिक तकनीक के साथ कैसे मिलाते हैं।




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