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​न्यूज़ चैनलों की TRP पर सस्पेंस बरकरार: मंत्रालय ने 4 हफ्ते और बढ़ाई रोक,‘लैंडिंग पेज’ पर छिड़ी जंग

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नई दिल्ली | मई 2026

​भारत के न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर में रेटिंग्स को लेकर चल रहा गतिरोध थमता नज़र नहीं आ रहा है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने न्यूज़ चैनलों की रेटिंग्स (TRP) जारी करने पर लगी पाबंदी को अगले चार हफ्तों के लिए और बढ़ा दिया है। अब 6 मई के बाद भी ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) डेटा जारी नहीं कर पाएगा।

​सरकार का यह फैसला मीडिया इंडस्ट्री के भीतर उठ रहे विवादों और नई रेटिंग पॉलिसी के कार्यान्वयन में आ रही चुनौतियों को दर्शाता है।

​1. ‘लैंडिंग पेज’ विवाद: रेटिंग की शुद्धता बनाम बिजनेस

​इस पूरे विवाद की जड़ 27 मार्च 2026 को जारी की गई नई TRP पॉलिसी है। इस पॉलिसी के तहत सरकार ने रेटिंग गणना से ‘लैंडिंग पेज’ के डेटा को हटाने का निर्देश दिया है।

  • क्या है लैंडिंग पेज? जब कोई दर्शक टीवी ऑन करता है, तो डिस्ट्रीब्यूटर (केबल या DTH) द्वारा सेट किया गया चैनल सबसे पहले स्क्रीन पर आता है। इससे उस चैनल की ‘व्यूअरशिप’ कृत्रिम रूप से बढ़ जाती है।
  • टकराव: बड़े ब्रॉडकास्टर्स इसे अपने मार्केटिंग निवेश का हिस्सा मानते हैं, जबकि छोटे चैनल और सरकार इसे डेटा के साथ “छेड़छाड़” मानती है। मंत्रालय का मानना है कि लैंडिंग पेज हटाने से ही दर्शकों की वास्तविक पसंद का पता चलेगा।

​2. विज्ञापन जगत में खलबली: डिजिटल की ओर झुकाव

​न्यूज़ चैनलों के लिए यह समय आर्थिक रूप से काफी चुनौतीपूर्ण है। TRP के अभाव में विज्ञापनों का गणित बिगड़ गया है:

  • डेटा का अभाव: बिना रेटिंग के विज्ञापन एजेंसियां यह तय नहीं कर पा रही हैं कि किस स्लॉट पर कितना पैसा खर्च किया जाए।
  • डिजिटल माइग्रेशन: डेटा की कमी के कारण कई ब्रांड्स ने अपना बजट टीवी से हटाकर YouTube और सोशल मीडिया जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर शिफ्ट कर दिया है, जहाँ प्रति सेकंड का डेटा उपलब्ध है।

​3. सरकार का रुख: ‘देर भली पर दुरुस्त’

​मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि सरकार जल्दबाजी में रेटिंग शुरू करके पुराने ‘TRP स्कैम’ जैसी स्थिति दोबारा पैदा नहीं करना चाहती। आगामी चार हफ्तों में सरकार निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित कर सकती है:

  • सैंपल साइज में वृद्धि: रेटिंग को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए ‘बैरोमीटर’ की संख्या बढ़ाना।
  • डेटा सिक्योरिटी: यह सुनिश्चित करना कि डेटा के साथ कोई बाहरी छेड़छाड़ न हो सके।
  • ब्रॉडकास्टर्स से संवाद: असंतुष्ट चैनलों के साथ बीच का रास्ता निकालना।

​4. इंडस्ट्री की प्रतिक्रिया

​मीडिया विशेषज्ञों का मानना है कि रेटिंग्स पर यह लंबी रोक न्यूज़ कंटेंट की गुणवत्ता पर भी असर डाल सकती है। जहाँ कुछ इसे “सफाई अभियान” मान रहे हैं, वहीं कुछ इसे न्यूज़ बिजनेस के लिए “डेथ वारंट” की तरह देख रहे हैं।

विशेषज्ञ राय: “TRP पर लगी यह रोक केवल एक तकनीकी रुकावट नहीं है, बल्कि यह भारतीय टीवी न्यूज़ के भविष्य की दिशा तय करने वाला फैसला है। अगर लैंडिंग पेज हटता है, तो कंटेंट की अहमियत बढ़ेगी, लेकिन चैनलों को अपनी रेवेन्यू स्ट्रेटजी पूरी तरह बदलनी होगी।”

 

अगला कदम: अब सबकी नज़रें जून 2026 के पहले हफ्ते पर टिकी हैं, जब मंत्रालय इस रोक की समीक्षा करेगा। क्या BARC नए नियमों के साथ डेटा जारी करने के लिए तैयार होगा? यह देखना बाकी है।

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Author: media4samachar

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