नई दिल्ली/कानपुर: देश के प्रतिष्ठित मीडिया घरानों में से एक, जागरण प्रकाशन लिमिटेड (JPL) के भीतर चल रहा कॉर्पोरेट विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। कंपनी के प्रमोटर ग्रुप ने बोर्ड के 8 महत्वपूर्ण निदेशकों को पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए 29 मई 2026 को दोपहर 12:30 बजे एक एक्स्ट्रा-ऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) बुलाई गई है। यह पूरी बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संपन्न होगी।
प्रमोटर ग्रुप का कड़ा रुख
इस पूरे बदलाव की पहल प्रमोटर ग्रुप की कंपनी ‘जागरण मीडिया नेटवर्क इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड’ की ओर से की गई है। उल्लेखनीय है कि इस कंपनी के पास जागरण प्रकाशन की करीब 67.97% हिस्सेदारी है। प्रमोटर ग्रुप का तर्क है कि इन निदेशकों की नियुक्ति प्रक्रिया में विसंगतियां थीं, जिसे सुधारना कंपनी के हित में आवश्यक है।
इन 8 दिग्गजों पर गिरी गाज
प्रस्तावित सूची में स्वतंत्र निदेशकों से लेकर पूर्णकालिक निदेशकों के नाम शामिल हैं। जिन सदस्यों को हटाने के लिए प्रस्ताव लाया गया है, उनमें शामिल हैं:
- दिव्या कराणी (स्वतंत्र निदेशक)
- शैलेन्द्र स्वरूप (निदेशक)
- अनीता नय्यर (निदेशक)
- केमिशा सोनी (स्वतंत्र निदेशक)
- प्रमोद अग्रवाल (निदेशक)
- शालीन टंडन (निदेशक)
- अरुण अनंत (निदेशक)
- सतीश चंद्र मिश्रा (पूर्णकालिक निदेशक)
NCLT से हरी झंडी के बाद बढ़ी हलचल
यह मामला काफी समय से कानूनी दांवपेच में फंसा हुआ था। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में दायर विभिन्न याचिकाओं के कारण पहले इस EGM पर रोक लगा दी गई थी। हालांकि, अप्रैल 2026 में NCLT ने इस रोक को हटाते हुए स्पष्ट किया कि सभी पक्ष कानून के दायरे में रहकर अपनी प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकते हैं। ट्रिब्यूनल के इसी आदेश के बाद कंपनी ने 5 मई को शेयरधारकों को मीटिंग का नोटिस जारी किया।
वोटिंग का गणित और प्रक्रिया
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि निदेशकों को हटाने के लिए कंपनी अधिनियम 2013 के तहत आवश्यक प्रस्ताव लाए जाएंगे।
- कट-ऑफ डेट: वोटिंग के लिए पात्र सदस्यों की पहचान हेतु 22 मई 2026 की तारीख तय की गई है।
- ई-वोटिंग: शेयरधारक 26 मई से 28 मई 2026 के बीच अपने मत का प्रयोग कर सकते हैं।
- EGM वोटिंग: जो सदस्य ई-वोटिंग नहीं कर पाएंगे, उन्हें 29 मई को मीटिंग के दौरान वोट करने का अवसर मिलेगा।
भविष्य पर पड़ सकता है बड़ा असर
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह विशेष प्रस्ताव (Special Resolution) पास हो जाता है, तो जागरण प्रकाशन के बोर्ड का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा। नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की आपत्तियों और प्रमोटर ग्रुप के कड़े रुख के बीच यह बैठक न केवल कंपनी के प्रबंधन बल्कि इसकी भविष्य की व्यावसायिक रणनीति को भी नई दिशा देगी।




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