इराक में हाल ही में हुए भीषण बम धमाकों से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। इन हमलों में दर्जनों बेगुनाह लोगों की जान चली गई, जबकि दर्जनों अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इस संवेदनशील और खतरनाक माहौल के बीच, भारत का पहला हिंदी नेशनल न्यूज़ चैनल ‘आज की खबर’ खतरे की परवाह किए बिना सबसे पहले ग्राउंड ज़ीरो पर पहुंचा है।
चैनल के डिप्टी एडिटर व वरिष्ठ पत्रकार अली शरर ने अपने कैमरामैन मनोज के साथ इराक के शलेमचा बॉर्डर और ‘अली शरर’ इलाके में पहुंचकर वहां की पल-पल की ताजा स्थिति दर्शकों के सामने रखी।
कर्बला के पास हुए धमाकों की सबसे पहली और एक्सक्लूसिव तस्वीरें
’आज की खबर’ भारत का एकमात्र ऐसा पहला चैनल बना, जिसने पवित्र शहर कर्बला के नज़दीक हुए सिलसिलेवार हमलों के बाद की सबसे पहली एक्सक्लूसिव तस्वीरें और वीडियो फुटेज अपने दर्शकों तक पहुंचाए।
ग्राउंड ज़ीरो से रिपोर्टिंग करते हुए अली शरर ने वहां हुए विनाश, राहत-बचाव कार्य और पीड़ितों के दर्द को कैमरे में कैद किया। हालांकि, ‘आज की खबर’ की इस त्वरित और साहसिक कवरेज के बाद अन्य भारतीय मीडिया संस्थान (जैसे NDTV) भी वहां पहुंचे, लेकिन सबसे तेज़ और सबसे पहले खबरें पहुंचाने का रिकॉर्ड ‘आज की खबर’ के नाम ही रहा।
“युद्ध और संघर्ष क्षेत्र से रिपोर्टिंग करना हमेशा जोखिम भरा होता है, लेकिन दर्शकों तक सच और सही जानकारी पहुंचाना ही पत्रकारिता का धर्म है।”
— इराक से ग्राउंड कवरेज के दौरान अली शरर
16 सालों का अनुभव और इंटरनेशनल रिपोर्टिंग में महारत
वरिष्ठ पत्रकार अली शरर पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। वे अंतरराष्ट्रीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में एक मंजे हुए पत्रकार माने जाते हैं।
अपने लंबे करियर के दौरान वे कई बड़े मीडिया घरानों जैसे ETV News Network, Network18, News India और वर्तमान में ‘आज की खबर’ के माध्यम से दुनिया के कई संवेदनशील हिस्सों से अंतर्राष्ट्रीय कवरेज कर चुके हैं।
जंतर-मंतर से लेकर इराक तक: हर बड़े मुद्दे पर सीधी नज़र
इराक और ईरान के दौरे पर रवाना होने से ठीक पहले अली शरर ने देश की राजधानी दिल्ली स्थित जंतर-मंतर से भी राजनीतिक और सामाजिक हलचलों की व्यापक कवरेज की थी।
वहां उन्होंने सरकार के मंत्रियों से मुलाकात कर बाहर निकले CJP पार्टी के सौरव दास और अभिषेक से एक्सक्लूसिव बातचीत की थी, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर काफी सुर्खियां बटोरी थीं। जंतर-मंतर के उस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद अब इराक के युद्धग्रस्त इलाकों से उनकी यह जांबाज रिपोर्टिंग उनके अंतरराष्ट्रीय अनुभव को एक बार फिर साबित करती है।





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