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डी.बी.कॉर्प बोर्ड की बड़ी मंजूरी: प्रमोटर ग्रुप की दो कंपनियां ‘पब्लिक कैटेगरी’ में होंगी शामिल

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​मीडिया क्षेत्र की दिग्गज कंपनी डी.बी. कॉर्प लिमिटेड (D.B. Corp) के निदेशक मंडल (बोर्ड) ने एक बड़ा कॉर्पोरेट फैसला लिया है। बोर्ड ने प्रमोटर ग्रुप से जुड़ी दो कंपनियों—BEDR Realcon Private Limited और Diligent Pinkcity Center Private Limited—को ‘प्रमोटर ग्रुप’ (Promoter Group) से हटाकर ‘पब्लिक’ (Public) कैटेगरी में री-क्लासिफाई (पुनर्वर्गीकृत) करने के प्रस्ताव को आधिकारिक मंजूरी दे दी है।

​हालांकि, कंपनी ने साफ किया है कि यह बदलाव संबंधित स्टॉक एक्सचेंजों की अंतिम मंजूरी और भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के नियमों के पूर्ण अनुपालन के बाद ही कानूनी रूप से प्रभावी होगा।

​बोर्ड बैठक में गहन समीक्षा के बाद लिया गया फैसला

​कंपनी द्वारा गुरुवार (16 जुलाई) को स्टॉक एक्सचेंजों को साझा की गई नियामक फाइलिंग (Regulatory Filing) के अनुसार, बोर्ड की एक अहम बैठक में दोनों कंपनियों द्वारा भेजे गए री-क्लासिफिकेशन के अनुरोध पर विस्तार से विचार किया गया।

​”बोर्ड ने दोनों संस्थाओं द्वारा दिए गए कारणों, घोषणाओं और आवश्यक आश्वासनों की गहन समीक्षा की। सभी कानूनी पहलुओं और सेबी के मानदंडों पर खरा उतरने के बाद ही इस प्रस्ताव को हरी झंडी दिखाई गई है।” – डी.बी. कॉर्प लिमिटेड

 

​यह बैठक गुरुवार सुबह 10:30 बजे शुरू हुई और करीब एक घंटे से अधिक समय तक चलने के बाद सुबह 11:40 बजे समाप्त हुई, जिसमें इस प्रस्ताव के साथ-साथ संबंधित स्टॉक एक्सचेंजों के पास आवश्यक आवेदन दाखिल करने की भी स्वीकृति दे दी गई।

​री-क्लासिफिकेशन के लिए इन प्रमुख शर्तों को किया गया पूरा

​डी.बी. कॉर्प के बोर्ड ने रिकॉर्ड पर लिया कि BEDR Realcon और Diligent Pinkcity Center तथा उनसे जुड़े लोगों की स्थिति सेबी (Listing Obligations and Disclosure Requirements) रेगुलेशंस के पूरी तरह अनुरूप है। इस मंजूरी के पीछे निम्नलिखित मुख्य बिंदु रहे:

  • सीमित वोटिंग अधिकार: दोनों कंपनियां मिलकर डी.बी. कॉर्प के कुल वोटिंग अधिकारों का 10 फीसदी से अधिक हिस्सा नहीं रखती हैं।
  • प्रबंधन पर कोई नियंत्रण नहीं: कंपनी के दैनिक संचालन या रणनीतिक फैसलों पर इन दोनों संस्थाओं का प्रत्यक्ष (Direct) या अप्रत्यक्ष (Indirect) रूप से कोई नियंत्रण नहीं है।
  • निदेशक मंडल में शून्य प्रतिनिधित्व: दोनों कंपनियों के पास डी.बी. कॉर्प में कोई विशेष अधिकार (Special Rights) नहीं हैं। न तो उनका बोर्ड में कोई प्रतिनिधि या नामित निदेशक (Nominee Director) है और न ही वे कंपनी के ‘की मैनेजेरियल पर्सनल’ (KMP) का हिस्सा हैं।
  • साफ वित्तीय रिकॉर्ड: कंपनी ने स्पष्ट किया कि दोनों संस्थाएं न तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के तहत जानबूझकर कर्ज न चुकाने वाली (Wilful Defaulter) हैं और न ही उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी (Fugitive Economic Offender) घोषित किया गया है।

​आगे की प्रक्रिया

​बोर्ड से हरी झंडी मिलने के बाद, अब डी.बी. कॉर्प इस री-क्लासिफिकेशन को अमलीजामा पहनाने के लिए जल्द ही शेयर बाजारों (NSE और BSE) के समक्ष औपचारिक आवेदन प्रस्तुत करेगी। स्टॉक एक्सचेंजों से अंतिम मंजूरी मिलते ही शेयरहोल्डिंग पैटर्न में यह बदलाव प्रभावी हो जाएगा

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Author: media4samachar

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