रायपुर/नोएडा: छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग (DPR) इन दिनों भ्रष्टाचार और अपात्र न्यूज़ पोर्टल्स को ‘रेवड़ियों’ की तरह विज्ञापन बांटने के आरोपों से घिरा हुआ है। एक चौंकाने वाले खुलासे में यह सामने आया है कि विभाग की एम्पैनलमेंट लिस्ट (Empanelment List) में ऐसे न्यूज़ पोर्टल्स का नाम शामिल है, जिनका धरातल पर कोई अस्तित्व ही नहीं है।

995 डॉलर में बिक रहा ‘एम्पैनल्ड’ पोर्टल
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जनसंपर्क विभाग की सूची में दर्ज ‘aapkanews.com’ नाम की वेबसाइट वर्तमान में GoDaddy जैसे डोमेन प्लेटफॉर्म पर 995 डॉलर (करीब 83,000 रुपये) में बिक्री के लिए उपलब्ध है। सवाल यह उठता है कि जब वेबसाइट का डोमेन ही बिक रहा है और पोर्टल अस्तित्व में नहीं है, तो उसे सरकारी विज्ञापन और भुगतान किस आधार पर किया जा रहा है?
बड़े बाबू’ की मेहरबानी और कमीशन का खेल
सूत्रों और स्थानीय पत्रकारों का आरोप है कि इस पूरे खेल के पीछे विभाग के ‘बड़े बाबू’ रवि मित्तल का हाथ है। आरोप है कि विभाग के कुछ रसूखदार अधिकारी कमीशन के बदले फर्जी और निष्क्रिय पोर्टल्स को लिस्ट में बनाए रखते हैं, जबकि दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ के वास्तविक और मेहनती पत्रकार अपने हक के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
”गरीब छत्तीसगढ़ी पत्रकार अपने न्यूज़ पोर्टल की मान्यता के लिए चप्पलें घिस रहा है, लेकिन कमीशन न दे पाने के कारण उसे लिस्ट से बाहर रखा जाता है।” — स्थानीय पत्रकार
भ्रष्टाचार के गंभीर सवाल:
वेरिफिकेशन में चूक या मिलीभगत? क्या विभाग हर साल एम्पैनल्ड पोर्टल्स का फिजिकल और टेक्निकल वेरिफिकेशन नहीं करता?
भुगतान की बंदरबांट: जो पोर्टल लाइव ही नहीं है, उसके बिल कैसे पास हो रहे हैं?
पारदर्शिता पर प्रहार: क्या यह योग्य और ईमानदार पत्रकारों के साथ अन्याय नहीं है?
इस मामले में अभी तक जनसंपर्क विभाग के किसी भी वरिष्ठ अधिकारी की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन जिस तरह के सबूत सामने आ रहे हैं, वह किसी बड़े ‘विज्ञापन घोटाले’ की ओर इशारा कर रहे हैं।





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