
नोएडा (गौतमबुद्धनगर): मीडिया जगत की समस्याओं को बेबाकी से उठाने वाले प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान Media4samachar की खबर का एक बार फिर बड़ा असर देखने को मिला है। APN News (एफएमसीजी ग्रुप) द्वारा अपनी महिला एंकरों का महीनों का वेतन रोकने और उन्हें अवैध रूप से नौकरी से निकालने के मामले में श्रम विभाग ने अब बेहद कड़ा रुख अपनाया है।
Media4samachar द्वारा एंकरों के शोषण के मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद, उप श्रम आयुक्त (DLC) कार्यालय, नोएडा ने संस्थान के प्रबंधन को अंतिम चेतावनी जारी करते हुए सभी संबंधित अभिलेखों (Records) के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है।
📍 तीन एंकरों का मामला: 2 साल से न्याय का इंतज़ार
यह पूरा विवाद संस्थान की तीन महिला एंकरों की शिकायत से जुड़ा है, जो पिछले लगभग दो वर्षों से अपने हक के पैसे के लिए भटक रही हैं।
शिकायत के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
तीन से चार माह का वेतन बकाया: आरोप है कि एंकरों का तीन-तीन महीने का वेतन संस्थान द्वारा दबा लिया गया है।
अवैध निष्कासन: एंकरों का आरोप है कि उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना या नियमानुसार नोटिस पीरियड के, अवैध रूप से कार्य से पृथक (Terminate) कर दिया गया।
अभिलेखों की लुका-छिपी: श्रम प्रवर्तन अधिकारी की जांच में यह गंभीर तथ्य सामने आया कि कंपनी ने बार-बार मांगे जाने के बावजूद इन एंकरों के वेतन रजिस्टर और उपस्थिति रिकॉर्ड विभाग को उपलब्ध नहीं कराए।
⚖️ कानूनी शिकंजा: इन धाराओं में फंसेगा प्रबंधन
श्रम विभाग ने Media4samachar की रिपोर्ट और एंकरों की शिकायत का संज्ञान लेते हुए स्पष्ट किया है कि प्रबंधन की यह मनमानी दंडनीय है:
औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (धारा 11-3): विभाग ने इसे सिविल न्यायालय के आदेश की अवहेलना माना है।
वेतन भुगतान अधिनियम, 1936 (धारा 14): निरीक्षक द्वारा मांगे गए रिकॉर्ड पेश न करना सीधे तौर पर अपराध की श्रेणी में आता है।
न्यूनतम वेतन अधिनियम, 1948: यदि भुगतान मानकों से कम पाया गया, तो अतिरिक्त कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
Media4Samachar का प्रभाव
यह मामला न केवल वेतन के भुगतान का है, बल्कि मीडिया संस्थानों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। Media4samachar ने इन महिला एंकरों की आवाज को बुलंद किया, जिसके परिणामस्वरूप अब श्रम विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रबंधन को चेतावनी दी है कि यदि वे निर्धारित तिथि पर उपस्थित नहीं होते हैं, तो एकपक्षीय विधिक कार्यवाही शुरू कर दी जाएगी।




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