नोएडा (मीडिया4समाचार ब्यूरो):
पत्रकारिता की शुचिता का दम भरने वाले संस्थानों के भीतर जब ‘फर्जीवाड़े’ की जड़ें गहरी हो जाएं, तो सवाल उठना लाजमी है। न्यूज़ इंडिया 24X7 में इन दिनों जो कुछ घट रहा है, वह न केवल शर्मनाक है बल्कि एक बड़े संगठित धोखे की ओर इशारा करता है। 26 फरवरी 2026 की शाम को वायरल हुए एक वीडियो ने संस्थान के भीतर मचे उस घमासान को सड़क पर ला दिया है, जिसे अब तक दबाने की कोशिश की जा रही थी।
1. वायरल वीडियो: सरेआम बेइज्जती या कड़वा सच?
घटना 26 फरवरी की है, जब संस्थान के चेयरमैन शैलेंद्र शर्मा ने एक जनरल मीटिंग बुलाई। इस मीटिंग का एजेंडा भले ही डिजिटल आउटपुट था, लेकिन असली निशाना थे मुख्य संपादक राणा यशवंत और उनकी ‘खास’ टीम।
वीडियो में चेयरमैन फाइलों की ओर इशारा करते हुए बोल रहे हैं— “ये सारे डॉक्यूमेंट फर्जी हैं।” उन्होंने वहां मौजूद दर्जनों कर्मचारियों के सामने स्पष्ट कर दिया कि इन नियुक्तियों के लिए सीधे तौर पर राणा यशवंत जिम्मेदार हैं और उनकी सैलरी का भुगतान भी वही करेंगे। मैनेजमेंट अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है।
2. राणा यशवंत का ‘सफाई अभियान’ या अपनों को रेवड़ी?
15 दिसंबर 2025 को जब राणा यशवंत ने इंडिया न्यूज़ छोड़कर यहाँ पदभार संभाला, तो उम्मीद थी कि चैनल नई ऊंचाइयों को छुएगा। लेकिन, उन्होंने आते ही ‘अपनों’ को फिट करने का खेल शुरू कर दिया।
अनुभवी बाहर: संस्थान के लिए सालों से पसीना बहाने वाले 50 से अधिक पुराने कर्मचारियों को बेरहमी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
बिना वेरिफिकेशन भर्ती: आरोप है कि राणा ने अपनी पसंद के 40 से ज्यादा नए लोगों को बिना किसी मानक प्रक्रिया (SOP) के भर्ती कर लिया।
मीडिया4समाचार की पड़ताल: पुराने कर्मचारियों का कहना है कि संपादक बनते ही राणा यशवंत ने एक तानाशाही रवैया अपनाया और संस्थान की पुरानी संस्कृति को नष्ट कर दिया।
3. एचआर का विस्फोटक खुलासा: संस्थान की एचआर तनु शर्मा के बयानों ने इस आग में घी डालने का काम किया है। एचआर विभाग के मुताबिक:
कई बार रिमाइंडर और ई-मेल भेजने के बावजूद नई टीम ने अपने जॉइनिंग दस्तावेज जमा नहीं किए।
जिन लोगों ने दस्तावेज दिए, उनकी सैलरी स्लिप और पिछले अनुभव के प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए।
चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ कर्मचारियों ने पकड़े जाने पर ईमेल के जरिए लिखित माफी भी मांगी है, जिसके स्क्रीनशॉट अब सार्वजनिक हो चुके हैं।
4. विवाद का त्रिकोण: कौन है असली गुनहगार?
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राणा यशवंत (संपादक) |
संस्थान के हितों से ऊपर ‘व्यक्तिगत वफादारी’ को तरजीह देना और नियमों को ताक पर रखना। |
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एचआर विभाग |
शुरुआती दौर में फ़ाइलों की जांच न कर पाना जिससे फर्जीवाड़ा बढ़ा,HR भी राणा यशवंत की खास सलाहकार और सहयोगी थी
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5. साख पर लगा अमिट दाग
किसी भी न्यूज़ चैनल की सबसे बड़ी पूंजी उसकी ‘विश्वसनीयता’ होती है। जब एक एडिटर-इन-चीफ पर ‘जाली कागजों’ के आधार पर अपनी टीम भर्ती करने का आरोप लगे, तो वह चैनल समाज को क्या आईना दिखाएगा? न्यूज़ इंडिया 24X7 का यह आंतरिक कलह अब कानूनी पेचीदगियों में फंसता नजर आ रहा है, क्योंकि फर्जी दस्तावेज बनाना और उनका उपयोग करना एक गंभीर आपराधिक मामला है।




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