गाजियाबाद में पुलिस की कार्यशैली पर अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। क्रॉसिंग रिपब्लिक थाना पुलिस द्वारा बार-बार आदेश देने के बावजूद CCTV फुटेज प्रस्तुत न किए जाने पर न्यायालय ने इसे “गंभीर कदाचार और न्यायालय की अवमानना” करार दिया है। अदालत ने थाना प्रभारी (SHO) क्रॉसिंग रिपब्लिक के खिलाफ ‘प्रकीर्ण वाद’ (Miscellaneous Case) दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
यह मामला मुकदमा संख्या 348/2025 और 349/2025 से जुड़ा है। इन मामलों में अभियुक्तों ने पुलिस पर अवैध हिरासत, ₹3 लाख की फिरौती मांगने और फर्जी मुठभेड़ रचने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
पुलिस के विरोधाभासी तर्कों पर अदालत का असंतोष
1 नवंबर 2025 के आदेश में अदालत ने पुलिस द्वारा फुटेज पेश न करने के लिए दिए गए दोनों तर्कों को विरोधाभासी और अस्वीकार्य बताया।
तकनीकी आधार: SHO ने रिपोर्ट में कहा कि थाने में तकनीशियन की अनुपलब्धता के कारण CCTV फुटेज सुरक्षित नहीं की जा सकी और इसके लिए 7 दिन का अतिरिक्त समय मांगा गया।
गोपनीयता आधार: दूसरी रिपोर्ट में पुलिस ने तर्क दिया कि CCTV फुटेज सार्वजनिक करने से थाने में आने वाली महिलाओं, बच्चों की गोपनीयता भंग होगी और मुखबिरों की पहचान उजागर हो सकती है।

अदालत ने कहा कि पुलिस के दोनों बयान परस्पर विरोधाभासी हैं और यह स्पष्ट करता है कि SHO जानबूझकर अदालत के आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं।
कोर्ट के कड़े निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने निम्न निर्देश दिए—
प्रकीर्ण वाद दर्ज: SHO, क्रॉसिंग रिपब्लिक के विरुद्ध अवमानना और गंभीर कदाचार के आरोप में प्रकीर्ण वाद दर्ज किया जाए।
एसीपी को निर्देश: आदेश की प्रति संबंधित एसीपी को भेजी जाए ताकि SHO द्वारा अदालत के आदेशों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
मेडिकल बोर्ड का गठन: मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को निर्देशित किया गया है कि एक मेडिकल बोर्ड गठित कर अभियुक्तों की चोटों का विस्तृत चिकित्सकीय परीक्षण कर रिपोर्ट नियत तिथि तक न्यायालय में प्रस्तुत करें।
अदालत ने यह भी कहा कि इस तरह का रवैया न्याय प्रक्रिया के प्रति असम्मान दर्शाता है और इसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता।





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