नोएडा डेस्क: हाल ही में ‘न्यूज़ इंडिया’ (News India) के न्यूज़ रूम से एक ऐसा वीडियो सामने आया है जिसने संस्थान के भीतर चल रहे ‘अंदरूनी कलह’ को चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है। वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि कैसे चैनल के चेयरमैन शैलेंद्र शर्मा और एडिटर-इन-चीफ राणा यशवंत के बीच तीखी झड़प हुई। सूत्रों की मानें तो यह विवाद लंबे समय से चल रहे संपादकीय मिस-मैनेजमेंट और अनुशासन की कमी का नतीजा है।
क्या प्रधान संपादक की साख पर लगा दाग ?
राणा यशवंत, जिन्होंने ‘आजतक’ और ‘इंडिया न्यूज़’ जैसे बड़े संस्थानों में काम किया है, उनकी कार्यशैली पर अब ‘न्यूज़ इंडिया’ में सवाल उठने लगे हैं। चेयरमैन शैलेंद्र शर्मा के साथ हुए इस विवाद के पीछे निम्नलिखित मुख्य कारण बताए जा रहे हैं:
मैनेजमेंट के साथ तालमेल का अभाव: खबरों के मुताबिक, राणा यशवंत और मैनेजमेंट के बीच पिछले कई महीनों से विज़न और ऑपरेशनल फैसलों को लेकर खींचतान चल रही थी।
अनुशासनहीनता और ईगो क्लैश:
वायरल वीडियो में चेयरमैन शैलेंद्र शर्मा काफी आक्रोशित नज़र आ रहे हैं। जानकारों का कहना है कि यह गुस्सा अचानक नहीं फूटा, बल्कि बार-बार की गई अनदेखी और एडिटर-इन-चीफ के ‘अड़ियल’ रवैये के कारण यह नौबत आई।
चैनल की परफॉरमेंस पर असर: चैनल की रेटिंग और आउटपुट को लेकर चेयरमैन की उम्मीदों पर न खरा उतर पाना भी इस विवाद की एक बड़ी वजह माना जा रहा है।
क्या ‘सीनियरिटी’ के नाम पर मनमानी संभव है ?
सोशल मीडिया पर एक बड़ा वर्ग यह सवाल उठा रहा है कि क्या ‘सीनियर जर्नलिस्ट’ होने का मतलब यह है कि आप संस्थान के मालिक या बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के प्रति जवाबदेह नहीं हैं? चेयरमैन शैलेंद्र शर्मा के समर्थकों का कहना है कि जब कोई कर्मचारी या संपादक संस्थान के हितों के खिलाफ जाकर अपनी व्यक्तिगत ईगो को प्राथमिकता देने लगे, तो मैनेजमेंट को सख्त कदम उठाना ही पड़ता है।
न्यूज़ रूम में मर्यादा की सीमाएं टूटीं
जिस तरह से राणा यशवंत और चेयरमैन के बीच शब्दों की मर्यादा टूटी, उसने न्यूज़ इंडिया की साख को गहरा धक्का पहुँचाया है। यह विवाद केवल एक झगड़ा नहीं, बल्कि इस बात का सबूत है कि संस्थान के भीतर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा था और एडिटर-इन-चीफ के तौर पर राणा यशवंत टीम और मैनेजमेंट को एक साथ लेकर चलने में विफल रहे।
क्या राणा यशवंत का ‘नाम’ उनके काम और अनुशासन पर भारी पड़ रहा था? क्या एक एडिटर को संस्थान के प्रति अपनी जवाबदेही भूलनी चाहिए ?


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