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धार्मिक मंचों पर महिलाओं के अपमान को लेकर एबीपी न्यूज की एंकर चित्रा त्रिपाठी ने प्रसिद्ध कथा वाचक अनिरुद्धाचार्य से सार्वजनिक रूप से माफी की मांग की है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में एक और बहस खड़ी हो गई है—क्या एक धर्मगुरु के प्रति मीडिया की भाषा मर्यादित रही?
जहां एक ओर चित्रा त्रिपाठी ने महिला अस्मिता के सवाल पर कड़ा रुख अपनाया, वहीं कई लोगों का मानना है कि तू-तड़ाक और व्यंग्यपूर्ण अंदाज़ पत्रकारिता की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं। मामला सिर्फ जवाबदेही का नहीं, पेशेवर संतुलन का भी है।




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