नोएडा: इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पत्रकारों की असुरक्षित नौकरी और प्रबंधन की मनमानी का एक और मामला सामने आया है। ‘HNN News’ चैनल में दिल्ली में कार्यरत महिला और पुरुष रिपोर्टरों को बीते 4 अगस्त को अचानक और बिना किसी लिखित सूचना के नौकरी से निष्कासित कर दिया गया। घटना के समय रिपोर्टर दिल्ली में चैनल के लिए ग्राउंड कवरेज पर थे।
फील्ड कवरेज के बीच से बुलाकर थमाया फरमान
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 4 अगस्त को दोपहर में दिल्ली में एक कार्यक्रम कवर कर रहे रिपोर्टरों को प्रबंधन की ओर से अचानक संदेश मिला कि वे दोपहर 2:00 बजे नोएडा सेक्टर-9 स्थित चैनल के दफ़्तर पहुंचे। जब वे कार्यालय पहुंचे, तो प्रबंधकीय संपादक (Managing Editor) मुकेश कुमार से उनकी बातचीत हुई।
बातचीत के दौरान प्रबंधकीय संपादक ने मौखिक रूप से जानकारी दी कि “आज चैनल के साथ आपका आखिरी दिन है। यह टॉप मैनेजमेंट का फैसला है।” हैरान करने वाली बात यह रही कि संपादक ने खुद रिपोर्टरों के कामकाज और रिपोर्टिंग की सराहना की और काम को लेकर संतोष जताया, लेकिन इसके बावजूद शीर्ष प्रबंधन के फैसले का हवाला देकर उन्हें हटाने की बात कही।
बिना ईमेल, बिना नोटिस जमा कराई माइक ID
इसके तुरंत बाद एडमिन और एचआर (HR) टीम ने रिपोर्टरों से चैनल का पहचान पत्र (Identity Card) और माइक ID जमा करने को कहा। जब उन्होंने अचानक हटाए जाने का कारण और लिखित आदेश/ईमेल मांगा, तो प्रबंधन की तरफ से कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया। वहीं HR हेड स्नेहा जी भी दफ्तर से जा चुकी थीं।
मामले की जानकारी जब चैनल के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर निर्दोष जी से ली गई, तो उन्होंने भी स्वीकार किया कि यह फैसला बिना किसी पूर्व नोटिस या ईमेल के लिया गया है।
एचआर की तरफ से नहीं आया कोई आधिकारिक बयान
एचआर टीम ने आईडी जमा कराने के बाद आश्वासन दिया था कि जल्द ही आधिकारिक ईमेल भेज दिया जाएगा। हालांकि, समय बीत जाने के बाद भी न तो प्रबंधन की तरफ से कोई निष्कासन पत्र (Termination Letter) भेजा गया है और न ही कोई लिखित कारण स्पष्ट किया गया है। रिपोर्टरों की तरफ से भी कोई इस्तीफा (Resignation) नहीं दिया गया है।
श्रम कानूनों के उल्लंघन पर उठे सवाल
मीडिया जगत में इस तरह अचानक और बिना किसी कानूनी प्रक्रिया (शो-कॉज़ नोटिस या नोटिस पीरियड) के पत्रकारों को हटाने की परिपाटी पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। किसी भी कर्मचारी को बिना लिखित नोटिस, बिना मेल और बिना कारण बताए निष्कासित करना श्रम कानूनों और ‘वर्किंग जर्नलिस्ट्स एक्ट’ के सिद्धांतों का स्पष्ट उल्लंघन माना जाता है।
Disclaimer: पीड़ित पत्रकारों द्वारा Media4samachar को भेजे गये मेल के अनुसार





Users Today : 35
Users Yesterday : 92