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सहारा इंडिया के तीन डायरेक्टर्स अधिकारियों की हुई विदाई

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​लखनऊ। सहारा इंडिया परिवार में दशकों तक अपना दबदबा रखने वाले तीन वरिष्ठ अधिकारियों को आखिरकार कंपनी से अंतिम विदाई दे दी गई। लखनऊ के सहारा इंडिया टावर में आयोजित एक सादे समारोह में सुधीर कुमार श्रीवास्तव, सतीश कुमार सिंह और ए.के. श्रीवास्तव को कार्यमुक्त किया गया।
​यह विदाई केवल एक रिटायरमेंट नहीं, बल्कि सहारा के उस ‘स्वर्ण युग’ के अंत का प्रतीक है जहाँ इन अधिकारियों की तूती बोलती थी।
प्रमुख अधिकारी और उनके रसूख के किस्से
​सहारा के भीतर इन अधिकारियों का कद इतना बड़ा था कि इनके दौरों पर विशेष पुलिस बल तैनात होता था। आइए जानते हैं इन तीन चेहरों के बारे में:
​1. सुधीर कुमार श्रीवास्तव (पूर्व मीडिया हेड)
​सहारा मीडिया के सर्वेसर्वा रहे सुधीर श्रीवास्तव का रसूख ऐसा था कि उनके पारिवारिक कार्यक्रमों में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल मोतीलाल बोरा मुख्य अतिथि हुआ करते थे।
​वो मशहूर किस्सा: एक बार बेटे के जन्मदिन पर उन्होंने राज्यपाल को इतनी तवज्जो दी कि पास खड़े चेयरमैन सुब्रत राय को नजरअंदाज कर दिया। नतीजा यह हुआ कि अगले ही दिन सुब्रत राय ने उन्हें पद से हटाकर स्वतंत्र मिश्रा को कमान सौंप दी थी।
​2. सतीश कुमार सिंह (एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर)
​70 वर्षीय सतीश सिंह को सुब्रत राय के समय तक लगभग 14 से 15 लाख रुपये प्रतिमाह की भारी-भरकम सैलरी और शाही सुविधाएं मिलती थीं। सुब्रत राय के निधन के बाद उनकी सैलरी घटाकर 2 लाख कर दी गई थी और अब उन्हें पूर्ण रूप से रिटायर कर दिया गया है।
​3. ए.के. श्रीवास्तव (एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर)
​अपनी खास कार्यशैली के लिए चर्चित ए.के. श्रीवास्तव की पहचान एक ‘रॉयल’ अधिकारी की थी। चर्चा है कि वे अपनी महंगी गाड़ी से तब तक नहीं उतरते थे, जब तक दर्जनों कर्मचारी उनके स्वागत में पैर छूने के लिए खड़े न हो जाएं। सुब्रत राय के बाद इनकी सैलरी में भी भारी कटौती की गई थी।

​बदलते आर्थिक समीकरण: लाखों से हजारों पर आई सैलरी
​सुब्रत राय के निधन के बाद सहारा ग्रुप के भीतर वित्तीय और प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव आए हैं। जिन अधिकारियों का वेतन लाखों में था, कंपनी ने उन्हें कम सैलरी पर रखा और अब धीरे-धीरे पुराने रसूखदार चेहरों को घर बैठने के निर्देश दिए जा रहे हैं।

निष्कर्ष: नए युग की शुरुआत?
​सहारा इंडिया टावर से इन तीनों की विदाई के वक्त सैकड़ों कर्मचारी मौजूद थे। सहारा में अभी भी कई ऐसे अधिकारी मौजूद हैं जो 70 वर्ष की आयु पार कर चुके हैं। देखना यह है कि कंपनी का नया प्रबंधन आने वाले समय में पुराने ढर्रे को पूरी तरह बदलता है या नहीं।

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Author: media4samachar

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