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यूपी: गैस एजेंसी के बाहर की ‘पुरानी’ वीडियो साझा करने पर हिंदी खबर चैनल के पत्रकार पर FIR दर्ज

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फर्रुखाबाद | 19 मार्च, 2026 उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में एलपीजी संकट की कथित भ्रामक खबर फैलाना एक पत्रकार को भारी पड़ गया है। नोएडा स्थित न्यूज़ चैनल ‘हिंदी खबर’ के रिपोर्टर अनुभव मिश्रा के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। प्रशासन का आरोप है कि पत्रकार ने पुराने वीडियो का इस्तेमाल कर जनता में भ्रम पैदा करने की कोशिश की।

क्या है पूरा विवाद?

​मामला जिले के कमालगंज क्षेत्र का है। रिपोर्ट के अनुसार, 13 मार्च को सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो वायरल हुए, जिनमें गैस एजेंसियों के बाहर भारी भीड़ और लंबी कतारें दिखाई दे रही थीं। इन वीडियो के आधार पर जिले में एलपीजी सिलेंडर की भारी किल्लत होने का दावा किया गया।

​जांच के बाद पुलिस ने पाया कि ये वीडियो 11 मार्च के थे, जिन्हें 13 मार्च की ताजा स्थिति बताकर साझा किया गया था। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि जिले में गैस की कोई कमी नहीं है।

किन धाराओं में दर्ज हुई FIR?

​पुलिस ने अनुभव मिश्रा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 353(1)(b) के तहत मामला दर्ज किया है। इस धारा के अंतर्गत:

  • ​इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भ्रामक जानकारी फैलाना।
  • ​ऐसी सूचना साझा करना जिससे जनता में डर या अशांति पैदा होने की संभावना हो।

चैनल और पत्रकार का अलग-अलग रुख

​इस मामले में ‘हिंदी खबर’ संस्थान और उनके रिपोर्टर के बयानों में अंतर देखने को मिला है:

  1. संस्थान की सफाई: चैनल के एडिटर-इन-चीफ अतुल अग्रवाल ने इसे “रिपोर्टर की चूक” बताया। उन्होंने कहा कि एक प्रशिक्षु (Intern) ने बिना पूरी जांच के पुराना वीडियो ट्वीट कर दिया था, जिसे बाद में हटा लिया गया।
  2. पत्रकार का तर्क: अनुभव मिश्रा ने एफआईआर को गलत बताया है। उनका कहना है कि क्षेत्र में ओटीपी (OTP) न आने और सर्वर डाउन होने की वजह से लोग वास्तव में परेशान थे। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कोई तथ्यात्मक गलती थी, तो पुलिस को पहले नोटिस देना चाहिए था, न कि सीधे एफआईआर।

प्रशासन की चेतावनी

​जिला आपूर्ति विभाग और पुलिस प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट खबरों पर ध्यान न दें। अधिकारियों का कहना है कि कुछ लोग बिना निर्धारित प्रक्रिया (KYC/Booking) के एजेंसी पहुँच रहे थे, जिससे अनावश्यक भीड़ जमा हुई, जिसे ‘संकट’ का रूप दे दिया गया।

संपादकीय टिप्पणी: यह मामला डिजिटल युग में ‘तथ्यों की पुष्टि’ (Fact-Check) की महत्ता को दर्शाता है। एक छोटी सी चूक पत्रकार के लिए कानूनी मुसीबत बन सकती है।

 

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Author: media4samachar

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