देहरादून/लखनऊ। पत्रकार पंकज मिश्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में अब हत्या की FIR दर्ज कर ली गई है। थाने में दर्ज कराई गई प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) के मुताबिक, यह कोई सामान्य मौत नहीं बल्कि सुनियोजित मारपीट के बाद हुई हत्या है। चौंकाने वाली बात यह है कि जिन लोगों के नाम और भूमिका पर पहले सोशल मीडिया, खासकर फेसबुक पोस्ट में सवाल उठाए गए थे, FIR में उन्हीं पर सीधे तौर पर हत्या का आरोप लगाया गया है।
एफआईआर के अनुसार, 15 दिसंबर 2025 की रात करीब 10 बजे अमित सहगल नाम का व्यक्ति अपने कुछ साथियों के साथ पंकज मिश्रा के घर पहुंचा। आरोप है कि गाली-गलौज के बाद जान से मारने की नीयत से पंकज मिश्रा के सीने और पेट पर लात-घूंसे मारे गए, जिससे उनके मुंह से खून निकलने लगा। आरोपियों ने यह कहकर मारपीट जारी रखी कि वह हार्ट और लिवर के मरीज हैं और “इतने में ही इसका काम हो जाएगा।”
मारपीट के बाद आरोपियों ने पंकज मिश्रा का मोबाइल फोन छीन लिया। जब उनकी पत्नी लक्ष्मी ने पुलिस को सूचना देने की कोशिश की तो आरोप है कि उनका मोबाइल भी छीन लिया गया और बदसलूकी की गई, जिसके बाद सभी आरोपी फरार हो गए।
रिपोर्ट के मुताबिक, गंभीर चोट और डर के कारण रात में पुलिस कार्रवाई नहीं हो सकी। लेकिन 16 दिसंबर की सुबह करीब 3 बजे पंकज मिश्रा की हालत अचानक बिगड़ गई। वह दर्द से कराहते हुए उठे और कुछ ही देर में अचेत होकर जमीन पर गिर पड़े। पड़ोसियों की मदद से परिजनों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
एफआईआर में साफ कहा गया है कि पंकज मिश्रा की मौत सीधे तौर पर मारपीट और हमले का नतीजा है। इसी आधार पर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है।
इस मामले ने इसलिए भी तूल पकड़ लिया है क्योंकि घटना से पहले और बाद में सोशल मीडिया पर जिन पत्रकारों/लोगों की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे, अब वही नाम एफआईआर में आरोपी के तौर पर दर्ज हैं। इससे यह मामला सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि पत्रकारों की आपसी खेमेबंदी, दबाव और सत्ता-संरक्षण से जुड़ा गंभीर सवाल भी खड़ा करता है।
अब निगाहें पुलिस जांच पर हैं—क्या यह मामला निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ेगा या फिर एक और पत्रकार की मौत फाइलों में दबा दी जाएगी?






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