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‘इंडिया अहेड’ चैनल में रिपोर्टरों से ₹5 से ₹10 हजार की जबरन उगाही अन्यथा बाहर

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पैसे न देने पर आईडी ब्लॉक करने और नौकरी से निकालने का अल्टीमेटम

विशेष रिपोर्ट: देश के प्रमुख चैनलों में शुमार रहा ‘इंडिया अहेड न्यूज़’ (India Ahead News) इन दिनों भयंकर वित्तीय संकट से जूझ रहा है। जयपुर (राजस्थान) से संचालित और अब बंद होने की कगार पर पहुँचे इस चैनल से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि चैनल के उच्च प्रबंधन (Management) की ओर से ₹5 लाख रुपये की सीधी डिमांड रखी गई है। इस फरमाइश को पूरा करने के लिए उत्तर प्रदेश के हर जिले के रिपोर्टर से ₹5,000 और ₹10,000 रुपये की अवैध वसूली की जा रही है।

प्रबंधन का फरमान और वसूली का पूरा खेल

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, नोएडा ऑफिस से कमान संभाल रहे नागेंद्र प्रताप सिंह का दावा है कि चैनल मालिक/प्रबंधन की तरफ से ₹5 लाख जुटाने का आदेश मिला है। इसके बाद उत्तर प्रदेश के इंचार्ज दानिश वारसी और नागेंद्र प्रताप सिंह ने यूपी के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप में फरमान जारी कर दिया।

  • ₹5,000 और ₹10,000 का कोटा: हर जिले के संवाददाताओं को अलग-अलग श्रेणी के हिसाब से तुरंत ₹5,000 से लेकर ₹10,000 रुपये तक जमा कराने का निर्देश दिया गया है।
  • प्रबंधन की ₹5 लाख की डिमांड: रिपोर्टरों पर दबाव बनाते हुए कहा जा रहा है कि चैनल की ओर से कुल ₹5 लाख रुपये की व्यवस्था करने को कहा गया है, जिसे ऊपर तक पहुँचाना अनिवार्य है।
  • नौकरी छीनने का अल्टीमेटम: आदेश में साफ चेतावनी दी गई है कि जो रिपोर्टर यह रकम जमा नहीं करेगा, उसे तुरंत प्रभाव से हटा दिया जाएगा और उस जिले में किसी अन्य व्यक्ति से पैसे लेकर उसे आईडी (ID) जारी कर दी जाएगी।

बिना सैलरी के काम कर रहे पत्रकारों पर दोहरी मार

​”हम महीनों से बिना वेतन के काम कर रहे हैं। चैनल चलाने का बोझ अब हमारे कंधों पर डाला जा रहा है। ₹5 लाख की इस डिमांड को पूरा करने के लिए हमसे जबरन ₹5,000 और ₹10,000 वसूले जा रहे हैं। पैसा न देने पर आईडी बंद करने की खुली धमकी मिल रही है।”

पीड़ित रिपोर्टर (नाम न छापने की शर्त पर)

पत्रकारिता के साख पर उठता गंभीर सवाल

​बिना सैलरी के काम करने वाले ग्रामीण और जिला स्तरीय रिपोर्टरों से चैनल चलाने के नाम पर इस तरह लाखों रुपये की उगाहना न केवल श्रम कानूनों का उल्लंघन है, बल्कि पत्रकारिता की साख पर भी गहरा दाग है। अब देखना यह है कि पीड़ित पत्रकारों की इस आवाज पर प्रेस काउंसिल या स्थानीय पुलिस-प्रशासन क्या सख्त कदम उठाता है।

 

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Author: media4samachar

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