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तहलका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल को हाई कोर्ट से लगा बड़ा झटका

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नई दिल्ली: तहलका (Tehelka) पत्रिका के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल (Tarun Tejpal) को वर्ष 2013 के बहुचर्चित यौन उत्पीड़न मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच से भारी झटका लगा है। उच्च न्यायालय ने मापुसा (Mapusa) की निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) द्वारा वर्ष 2021 में तेजपाल को बरी करने के फैसले को पूरी तरह रद्द करते हुए उन्हें दोषी करार दिया है।

​जस्टिस डॉ. नीला गोखले (Justice Dr. Neela Gokhale) और जस्टिस अमित जमसांडेकर (Justice Amit Jamadar) की खंडपीठ ने गोवा सरकार द्वारा दायर अपील को स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया।

इन गंभीर धाराओं में ठहराया गया दोषी

​अदालत ने मामले के सभी साक्ष्यों और तथ्यों पर पुनर्विचार करने के बाद तरुण तेजपाल को भारतीय दंड संहिता (IPC) की निम्नलिखित धाराओं के तहत दोषी माना है:

  • धारा 376(2)(f) एवं 376(2)(k): अपने अधिकार या स्थिति का लाभ उठाकर दुष्कर्म/यौन उत्पीड़न करना।
  • धारा 354A: यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment)।
  • धारा 354B: किसी महिला को निर्वस्त्र करने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग।

कोर्ट रूम का माहौल: तेजपाल ने उम्र का हवाला देकर मांगी राहत

​फैसला सुनाए जाने के समय तरुण तेजपाल व्यक्तिगत रूप से अदालत में मौजूद थे। दोषसिद्धि की घोषणा के तुरंत बाद उनके वरिष्ठ वकील आबाद पोंडा (Abad Ponda) ने पीठ से सजा की अवधि पर नरमी बरतने की गुहार लगाई।

​बचाव पक्ष की ओर से दो मुख्य मांगें रखी गईं:

  1. उम्र का हवाला: स्वयं तरुण तेजपाल ने अपनी उम्र 62 वर्ष बताते हुए अदालत से सजा में रियायत देने का अनुरोध किया।
  2. सुप्रीम कोर्ट जाने का समय: वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत से मांग की कि आदेश के अमल पर कम से कम आठ सप्ताह की रोक (Stay) लगाई जाए, ताकि वे इस फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) में अपील दायर कर सकें।

क्या था पूरा मामला? (घटनाक्रम पर एक नजर)

  • नवंबर 2013 (घटना): गोवा के एक 5-स्टार होटल में तहलका पत्रिका द्वारा आयोजित THiNK Fest कार्यक्रम के दौरान यह मामला सामने आया था। तहलका की ही एक जूनियर महिला पत्रकार ने तरुण तेजपाल पर होटल की लिफ्ट के भीतर यौन उत्पीड़न करने का गंभीर आरोप लगाया था।
  • 2013 – 2014 (गिरफ्तारी व जांच): मामले की एफआईआर दर्ज होने के बाद गोवा पुलिस ने तेजपाल को गिरफ्तार किया था। वे कई महीनों तक जेल में रहे, जिसके बाद उन्हें जमानत मिली।
  • मई 2021 (ट्रायल कोर्ट का फैसला): मापुसा की एक विशेष अदालत ने साक्ष्यों की कमी का हवाला देते हुए तरुण तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। इस फैसले की न्याय व्यवस्था और महिला अधिकारों से जुड़े संगठनों द्वारा कड़ी आलोचना की गई थी।
  • हाई कोर्ट की अपील: ट्रायल कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद गोवा सरकार ने इसे बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच में चुनौती दी। लंबी सुनवाई के बाद अब हाई कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को निरस्त कर दिया है।

दोपहर 2:30 बजे सजा का ऐलान

​दोषी करार दिए जाने के बाद अब सबकी निगाहें अदालत के अगले कदम पर टिकी हैं। बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ आज दोपहर 2:30 बजे तरुण तेजपाल की सजा की अवधि (Quantum of Sentence) की घोषणा करेगी।

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Author: media4samachar

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