अभिषेक उपाध्याय
पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर क्या अंडर सर्विलांस थे?
उन्होंने तो पुलिस को नहीं बताया था कि मैं फलानी ट्रेन से दिल्ली के रास्ते में हूं।
फिर पुलिस को किसने बताया?
पुलिस को गिरफ्तार करना था तो घर आ सकती थी।
वे शुभम जायसवाल की तरह दुबई तो नहीं बैठे थे।
न हीं कुछ ‘विशेष’ बाहुबलियों की तरह दिखाई देते हुए भी अदृश्य थे।
आखिर रात के 2 बजे शाहजहांपुर में ट्रेन से उतारकर गिरफ्तारी का क्या प्रयोजन था
जो व्यक्ति न वांछित है, न भगौड़ा।
जो सरकार के सेंटर में बैठकर सरकार की अनैतिकता को चुनौती दे रहा है,
क्या उसकी लोकेशन ट्रैक की जा रही थी?
क्या जो भी योगी आदित्यनाथ के खिलाफ बोल रहा है,
फिर वो चाहे उनके दौर के आकंठ भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा रहा हो, या फिर प्रचंड जातिवाद के खिलाफ,
क्या वो भी अंडर सर्विलांस है?
ये जलते हुए सवाल हैं।
आप चाहे एफआईआर का डर दिखाएं, गिरफ्तारी या फिर कुछ और,
जो आपके बस में है, कर लें!!
इन सवालों को एक रोज़ आपके रास्ते की ऐसी दीवार बनना है,
जिसके आगे राजनीति का रास्ता ही खत्म हो जाता है।!!





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