गोरखपुर: सहारा ग्रुप के अखबार ‘राष्ट्रीय सहारा’ (Rashtriya Sahara) में चल रहा विवाद अब सड़कों पर और उग्र हो चुका है। गोरखपुर यूनिट में उस समय बेहद नाटकीय स्थिति पैदा हो गई, जब यूनिट हेड पीयूष बंका ने आंदोलन कर रहे कर्मचारियों के सामने अपनी शर्ट उतार दी और खुद को पीटने की चुनौती दे डाली।
’इस्तीफा नहीं दूंगा, चाहे मार डालो’
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो के अनुसार, 70 वर्षीय यूनिट हेड पीयूष बंका कर्मचारियों के भारी विरोध के बीच अचानक भावुक हो गए। उन्होंने अपनी शर्ट के बटन खोलते हुए और सिर झुकाकर
कर्मचारियों से कहा:
”जूता निकाल के हमको मारो… जितना मार पाओ, उतना मारो। मैं इसी का पात्र हूं। लेकिन याद रखना, मैं राष्ट्रीय सहारा अखबार जब तक जीवित रहूंगा छोड़ूंगा नहीं।”
कर्मचारियों का आरोप: ‘सहानुभूति बटोरने का इमोशनल ड्रामा’
आंदोलनकारी कर्मचारियों ने पीयूष बंका के इस व्यवहार को ‘घोर बेहयाई’ और ‘मानसिक दबाव’ की रणनीति करार दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि:
यूनिट हेड खुद 70 साल के होकर भी पद नहीं छोड़ रहे, जबकि 40 साल के युवाओं पर जबरन इस्तीफा देने का दबाव बनाया जा रहा है।
यह पूरा घटनाक्रम पिटाई से बचने और आंदोलन को कमजोर करने के लिए किया गया एक ‘कपड़ाफाड़ ड्रामा’ था।
संस्थान में छंटनी का आधार प्रदर्शन नहीं, बल्कि तानाशाही है।
क्यों भड़का है कर्मचारियों का गुस्सा?
पिछले कई महीनों से राष्ट्रीय सहारा के विभिन्न केंद्रों (नोएडा, लखनऊ, पटना, दिल्ली) में वेतन और छंटनी को लेकर असंतोष व्याप्त है।
गोरखपुर में कर्मचारियों की मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं
जबरन इस्तीफे बंद हों: युवाओं को नौकरी से निकालना बंद किया जाए।
पुराने अधिकारियों की विदाई: उम्रदराज अधिकारियों को हटाकर प्रबंधन में ताजगी लाई जाए।
शीर्ष प्रबंधन से सीधी बात: कर्मचारी अब स्थानीय यूनिट हेड के बजाय सीधे सहारा के शीर्ष प्रबंधन से संवाद चाहते हैं।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
इस घटना का वीडियो व्हाट्सएप ग्रुप्स और ट्विटर (X) पर तेजी से साझा किया जा रहा है। लोग इसे एक प्रतिष्ठित संस्थान के पतन और कर्मचारियों के मानसिक शोषण का चरम बता रहे हैं। फिलहाल, संस्थान के शीर्ष प्रबंधन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।





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