उत्तर प्रदेश: मीडिया जगत से इस वक्त की एक बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। चर्चित समाचार नेटवर्क ‘इंडिया अहेड न्यूज चैनल’ में जिला संवाददाताओं से अवैध रूप से की गई पैसों की वसूली का मामला पूरी तरह से तूल पकड़ चुका है। आंतरिक विरोध, वरिष्ठ पत्रकारों के आक्रोश और चौतरफा शिकायतों के बाद अब पूर्व रेजिडेंट एडिटर यूपी ने बड़ा कदम उठाते हुए जिला प्रतिनिधियों से ली गई पूरी रकम वापस करने का फैसला लिया है।

वहीं, इस पूरे वसूली कांड की आंच सीधे चैनल के उच्च अधिकारियों तक पहुँच गई है। मामले में उत्तर प्रदेश के पूर्व रेजिडेंट एडिटर नागेंद्र प्रताप सिंह और पूर्व स्टेट हेड (यूपी) दानिश वारसी की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और दोनों के खिलाफ अनुशासनात्मक व वैधानिक कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
क्या है वसूली का पूरा मामला?
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में तैनात संवाददाताओं (District Correspondents) से आईडी कार्ड, अथॉरिटी लेटर, जिला स्तर पर पद बरकरार रखने और चैनल में काम देने के नाम पर कथित तौर पर मोटी रकम की उगाही की गई थी। इस वसूली को लेकर पिछले काफी समय से पीड़ित संवाददाताओं में भारी रोष व्याप्त था।
मामला तब और बिगड़ा जब पीड़ित जिला प्रतिनिधियों ने संगठित होकर इसकी शिकायत Media4samachar व सहयोगी मीडिया वेबसाइट भड़ास4मीडिया से की। चैनल की साख पर उठते सवालों और कानूनी शिकंजे के डर से नागेंद्र और दानिश ने आनन फानन में संज्ञान लिया हैं
1 अगस्त के बाद रकम वापसी का अल्टीमेटम
वरिष्ठ अधिकारियों और संवाददाताओं के आधिकारिक ग्रुप में यह संदेश जारी कर आश्वस्त किया गया है कि जिन भी जिला प्रतिनिधियों से पैसे लिए गए हैं, उनका पूरा हिसाब कर रकम वापस की जाएगी। इसके लिए 1 अगस्त के बाद की समय-सीमा (टाइमलाइन) तय की गई है।
खबर के मुख्य बिंदु:
- पैसा वापसी का वादा: 1 अगस्त के बाद सभी पीड़ित जिला संवाददाताओं की वसूली गई रकम लौटाने का दिया गया समय।
- गाज गिरना तय: रेजिडेंट एडिटर नागेंद्र प्रताप सिंह और स्टेट हेड दानिश वारसी पर सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी।
- प्रबंधन का कड़ा रुख: चैनल की छवि खराब करने वाले जिम्मेदार चेहरों को बाहर का रास्ता दिखाया गया
नागेंद्र प्रताप सिंह और दानिश वारसी की भूमिका पर जांच तेज
सूत्रों का दावा है कि वसूली नेटवर्क का संचालन और संरक्षण इन्हीं शीर्ष पदों पर बैठे व्यक्तियों द्वारा किया जा रहा था। प्राथमिक जांच में गड़बड़ी और वित्तीय हेरफेर के संकेत मिलने के बाद प्रबंधन ने सख्त रुख अपना लिया है। पूर्व रेजिडेंट एडिटर यूपी नागेंद्र प्रताप सिंह और पूर्व स्टेट हेड यूपी दानिश वारसी को उनके पदों से हटा दिया गया है, साथ ही उन पर संस्थागत कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई हैं
सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में तैनात संवाददाताओं (District Correspondents) से आईडी कार्ड, अथॉरिटी लेटर और पद बनाए रखने के नाम पर वसूली की जा रही थी।
मामले का पर्दाफाश होते ही उत्तर प्रदेश भर के पीड़ित जिला संवाददाताओं ने ‘Media4samachar’ व भड़ास 4मीडिया का सहृदय आभार व्यक्त किया है। पत्रकारों का कहना है कि अगर दोनों प्रतिष्ठित मीडिया मंच इस शोषित वर्ग की आवाज न उठाता, तो उनकी गाढ़ी कमाई यूँ ही लूट ली जाती।





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